
इस रणनीति की शुरुआत राजद के वरिष्ठ नेता और राबड़ी देवी के करीबी माने जाने वाले आशुतोष सिंह ने सासाराम से की
हैदर अली, रोहतास ब्यूरो संचार टाइम्स

बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। विधानसभा चुनावों के साल में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ‘A to Z’ फार्मूला को ज़मीन पर उतारने की कवायद अब तेज हो गई है। इस रणनीति की शुरुआत राजद के वरिष्ठ नेता और राबड़ी देवी के करीबी माने जाने वाले आशुतोष सिंह ने सासाराम से की है, जहां उन्होंने ‘क्षत्रिय महासम्मान यात्रा’ के बहाने तेजस्वी यादव की व्यापक सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश का संकेत दे दिया।

रोहतास से मिली शुरुआत
सासाराम (रोहतास) से शुरू हुई इस ‘क्षत्रिय महासम्मान यात्रा’ को लेकर राजद कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। आशुतोष सिंह ने इस यात्रा को सिर्फ क्षत्रिय समाज तक सीमित न बताते हुए इसे एक बड़ी सामाजिक एकजुटता का प्रारंभ बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा तेजस्वी यादव के ‘A to Z’ यानी सभी जातियों और वर्गों को जोड़ने की नीति की दिशा में पहला कदम है।

जल्द घोषित होगी तेजस्वी की अधिकार यात्रा
आशुतोष सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राजद सुप्रीमो तेजस्वी यादव की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ की तारीख जल्द ही तय की जाएगी, लेकिन उससे पहले पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ता और नेता समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ने की पहल कर रहे हैं। क्षत्रिय समाज के सम्मान की यह यात्रा उसी दिशा में एक मजबूत संकेत है।
एनडीए के लिए बन सकती है मुश्किल
बिहार में जातीय समीकरण हमेशा से राजनीति की धुरी रहे हैं। तेजस्वी यादव की ओर से ‘A to Z’ फार्मूले के तहत सभी वर्गों को जोड़ने की रणनीति अगर सफल होती है, तो यह एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। खास तौर पर तब जब बीजेपी और जेडीयू के बीच भीतरघात और सीट शेयरिंग को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं।
क्षत्रिय समाज को साधने की कोशिश
‘क्षत्रिय महासम्मान यात्रा’ के जरिए राजद ने संकेत दिया है कि वह अब परंपरागत वोटबैंक से बाहर निकलकर सवर्ण समाज को भी साधने की तैयारी में है। आशुतोष सिंह जैसे सवर्ण नेता की अगुवाई में यह यात्रा एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि तेजस्वी यादव अब समावेशी राजनीति की ओर अग्रसर हैं।
तेजस्वी यादव की ‘A to Z’ रणनीति अगर ज़मीनी स्तर पर असर दिखाती है, तो बिहार का चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। ‘क्षत्रिय महासम्मान यात्रा’ के बहाने राजद ने अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और अब सभी की निगाहें तेजस्वी की आगामी अधिकार यात्रा पर टिकी होंगी, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
