
ST.News Desk

नई दिल्ली: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने कहा है कि वह कोयला प्रेषण की प्रक्रिया में ऑटोमेटेड कोयला सैंपलिंग पर विशेष जोर दे रही है। कंपनी साइलो आधारित यंत्रीकृत लोडिंग सिस्टम के जरिए कोयले की आपूर्ति बढ़ा रही है, जिसे ऑटो मैकेनिकल सैंपलर्स के साथ एकीकृत किया गया है। CIL के अनुसार, यह तकनीक आधारित प्रक्रिया कोयले की गुणवत्ता में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करती है, मानवीय हस्तक्षेप को कम करती है और उपभोक्ताओं की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को काफी हद तक दूर करती है।
निष्पक्ष सैंपलिंग के लिए थर्ड पार्टी एजेंसियां
ईंधन आपूर्ति समझौते (Fuel Supply Agreement) के तहत कोयले की गुणवत्ता के “निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय” निर्धारण को सुनिश्चित करने के लिए सैंपलिंग और परीक्षण स्वतंत्र थर्ड पार्टी सैंपलिंग एजेंसियों (TPSA) के माध्यम से किए जा रहे हैं। वर्तमान में, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (PFCL) द्वारा पैनल में शामिल 11 TPSA, कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों के कोयला लोडिंग प्वाइंट्स पर सैंपलिंग और विश्लेषण का कार्य कर रही हैं। उपभोक्ताओं को गुणवत्ता आकलन के लिए किसी भी PFCL-पैनल एजेंसी को चुनने की स्वतंत्रता है।
इस वित्त वर्ष 80% तक साइलो लोडिंग का लक्ष्य
CIL ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दिसंबर तक रेल के माध्यम से लगभग 375 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया गया, जिसकी सैंपलिंग TPSA द्वारा की गई। इनमें से करीब आधा कोयला साइलो के जरिए भेजा गया, जहां ऑटो सैंपलर्स के माध्यम से गुणवत्ता प्रक्रिया नियंत्रण के उच्च मानक सुनिश्चित किए गए। कंपनी का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में साइलो आधारित प्रेषण को बढ़ाकर लगभग 80 प्रतिशत तक ले जाना है। इसके लिए नए फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स और साइलो लोडिंग की कमीशनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रेड अनुरूपता में सुधार
TPSA और रेफरी प्रयोगशालाओं के विश्लेषण के आधार पर, कोल इंडिया ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दिसंबर तक कुल ग्रेड अनुरूपता बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 82 प्रतिशत थी। कंपनी का कहना है कि साइलो लोडिंग बढ़ने से ग्रेड अनुरूपता में और सुधार देखने को मिलेगा।
ऑनलाइन विश्लेषण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू
CIL ने बताया कि रियल-टाइम गुणवत्ता आकलन के लिए दो अनुषंगी कंपनियों में ऑनलाइन एनालिसिस की शुरुआत की गई है, जिससे सैंपलिंग प्रक्रिया में तकनीक और पारदर्शिता को और बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि घरेलू कोयले की प्रकृति अत्यधिक विषम (heterogeneous) होती है। एक ही सीम (seam) में भी ग्रेड अलग-अलग हो सकते हैं और अक्सर एक ही रेक के विभिन्न स्थानों से लिए गए नमूनों का ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू समान नहीं होता। इसके बावजूद, CIL ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता आकलन में तकनीक के उपयोग को वह अपनी प्रमुख प्राथमिकता बनाए हुए है।

