
महत्वपूर्ण निर्णय से कानूनी निश्चितता सुदृढ़, घर खरीदारों को बड़ी राहत
संकटग्रस्त रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के समाधान में एनबीसीसी की भूमिका और मजबूत
ST.News Desk

भारत के रियल एस्टेट और अवसंरचना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसके तहत नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड सुपरटेक लिमिटेड की 16 अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूर्ण करेगा।
सर्वोच्च न्यायालय की इस पुष्टि से इन परियोजनाओं के लिए परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (पीएमसी) के रूप में एनबीसीसी की भूमिका को अंतिम कानूनी वैधता मिल गई है। इसके साथ ही परियोजनाओं के निष्पादन और समयबद्ध पूर्णता के लिए एक स्पष्ट, बाध्यकारी और हस्तक्षेप-मुक्त ढांचा स्थापित हुआ है। यह निर्णय देश के सबसे बड़े संकटग्रस्त रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में से एक के समाधान की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
न्यायिक समर्थन और स्पष्ट कानूनी ढांचा
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के बाद एनसीएलएटी के 12 दिसंबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत अंतरवर्ती आवेदन (आईए)-6557/2024 में एनबीसीसी द्वारा प्रस्तुत विचारार्थ विषयों (टीओआर) को स्वीकृति दी गई थी। इन टीओआर के अनुसार, एनबीसीसी को निर्माण की वास्तविक लागत पर 8 प्रतिशत परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) शुल्क प्रदान किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा तथा कोई भी न्यायालय या मंच एनबीसीसी द्वारा परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु जारी निर्देशों के क्रियान्वयन में हस्तक्षेप नहीं करेगा। साथ ही, यह निर्देश भी दिया गया है कि एनसीएलएटी द्वारा समाप्त किए गए सांविधिक अनुमोदनों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर नवीनीकृत किया जाए, ताकि परियोजनाओं का निर्बाध निष्पादन सुनिश्चित हो सके।
घर खरीदारों को बड़ी राहत
इस निर्णय से प्रभावित हजारों घर खरीदारों को बहुप्रतीक्षित राहत मिलने की उम्मीद है, जिनमें से कई एक दशक से अधिक समय से अपने घरों का कब्जा मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। न्यायिक समर्थन से हितधारकों का विश्वास मजबूत होगा और परियोजनाओं के पारदर्शी, सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
परियोजनाओं का विवरण
एनबीसीसी को सौंपी गई 16 सुपरटेक परियोजनाएं चार राज्यों में स्थित हैं—
- उत्तर प्रदेश: 12 परियोजनाएं
- उत्तराखंड: 1 परियोजना
- हरियाणा: 2 परियोजनाएं
- कर्नाटक: 1 परियोजना
इन परियोजनाओं में लगभग 50,000 आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं। कुल अनुमानित निर्माण लागत 9,445 करोड़ रुपये है, जिसमें सांविधिक प्रभार, शुल्क और आकस्मिक व्यय शामिल हैं। एनबीसीसी इन परियोजनाओं को बिना किसी वित्तीय देयता को स्वीकार किए, पूर्णतः पीएमसी के रूप में निष्पादित करेगा।
एनबीसीसी का प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड
एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने जटिल और संकटग्रस्त रियल एस्टेट परियोजनाओं के सफल निष्पादन में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। इसका प्रमुख उदाहरण आम्रपाली समूह की परियोजनाएं हैं, जहां माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एनबीसीसी को परियोजनाओं के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब तक, एनबीसीसी आम्रपाली परियोजनाओं के अंतर्गत 30,000 से अधिक आवासीय इकाइयों का निर्माण पूर्ण कर चुका है, जो इसकी मजबूत परियोजना प्रबंधन क्षमता, निष्पादन अनुशासन और प्रभावी हितधारक समन्वय को दर्शाता है।
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति प्रतिबद्धता
अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं के समाधान में अपनी निरंतर भूमिका के माध्यम से, एनबीसीसी ‘सभी के लिए आवास’ जैसी प्रमुख सरकारी पहलों का समर्थन करने, घर खरीदारों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने और माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत @2047’ के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
विस्तृत आदेश अपलोड होने के बाद, एनबीसीसी न्यायिक निर्देशों के अनुरूप अपने निष्पादन रोडमैप को अंतिम रूप देगा, ताकि गुणवत्ता, संधारणीयता और समय पर सुपुर्दगी सुनिश्चित की जा सके।

