खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और तेल-गैस की कीमतों में उछाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय हालात का बोझ आम जनता पर नहीं डाला जाएगा। पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों और विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए ताकि ऊर्जा संकट या महंगाई का सीधा असर लोगों तक न पहुंचे।
ST.News Desk
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। बैठक के दौरान खाड़ी देशों में जारी युद्ध और उससे पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव का असर भारत के आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए सभी मंत्रालयों और विभागों को मिलकर समन्वित तरीके से काम करना होगा।
बैठक में सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने को भी मंजूरी दे दी। इस परियोजना के लिए कुल लागत बढ़ाकर लगभग 8.69 लाख करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत के हर घर तक नल के जरिए स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। इस मिशन की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रिमंडल ने जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी है जिसमें जल जीवन मिशन को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित रखने के बजाय सेवा वितरण पर केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संरचनात्मक सुधारों को ध्यान में रखते हुए योजना की कुल लागत को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार की कुल सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये होगी।
इसके साथ ही सरकार ‘सुजलाम भारत’ नाम से एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा तैयार करेगी। इसके तहत देश के हर गांव को एक यूनिक सुजल गांव या सेवा क्षेत्र आईडी दी जाएगी। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए स्रोत से लेकर घर के नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की डिजिटल मैपिंग की जाएगी, जिससे निगरानी और प्रबंधन बेहतर होगा।
उधर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा इजरायल और खाड़ी देशों पर नए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई और मंगलवार को यह लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर रही, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में करीब 24 प्रतिशत अधिक है।
सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू स्तर पर संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

