ST.News Desk
Bharat Electricity Summit 2026 में भारत के बिजली क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक योजना पेश की गई, जिसमें आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर क्षमता विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।

जनरेशन प्लानिंग स्टडी के अनुसार, वर्ष 2035-36 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 1121 गीगावाट (GW) तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें 315 GW कोयला, 20 GW गैस, 22 GW परमाणु, और 77 GW बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट शामिल होंगे। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा, जिसमें 509 GW सौर ऊर्जा, 155 GW पवन ऊर्जा, 16 GW बायोमास और 6 GW स्मॉल हाइड्रो शामिल हैं।

इस योजना में ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) पर भी खास जोर दिया गया है। वर्ष 2035-36 तक 174 GW / 888 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें 80 GW / 321 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और 94 GW / 567 GWh पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) शामिल हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुल स्थापित क्षमता में से 786 GW यानी लगभग 70% हिस्सा नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित स्रोतों से होगा। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते कदम और कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समिट में प्रस्तुत यह रोडमैप भारत को न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करने में भी मददगार साबित होगा।

