
ST.News Desk

नई दिल्ली: भारत के बिजली वितरण एवं ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 220 किलोवोल्ट और उससे अधिक क्षमता वाली उच्च वोल्टेज बिजली वहन करने वाले 5 लाख सर्किट किलोमीटर (ckm) का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही देश की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) हो गई है। यह जानकारी गुरुवार को विद्युत मंत्रालय ने दी।
मंत्रालय के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े समकालिक राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी को हासिल की, जब राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी जोन से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए भाडला-II से सीकर-II सबस्टेशन तक 765 केवी की 628 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन को कमीशन किया गया।
इस ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से भाडला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स के रिन्यूएबल एनर्जी जोन से अतिरिक्त 1,100 मेगावाट बिजली की निकासी संभव हो सकेगी।
मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2014 से अब तक देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण किया गया और ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में 876 GVA की बढ़ोतरी हुई है।
वर्तमान में अंतर-क्षेत्रीय बिजली हस्तांतरण क्षमता 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव हुई है। इससे ‘वन नेशन–वन ग्रिड–वन फ्रीक्वेंसी’ के विजन को सफलतापूर्वक साकार किया गया है।
मंत्रालय ने आगे बताया कि क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में मौजूद अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 40,000 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनें और 399 GVA अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। यह अतिरिक्त क्षमता 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।
विद्युत मंत्रालय के अनुसार, 5 लाख सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों की उपलब्धि देश में विश्वसनीय, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से एकीकरण के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

