
ST.News Desk

New Delhi : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2025-26 सत्र के लिए अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए कॉन्ट्रैक्ट ढांचे में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली और रोहित शर्मा को नीचे के ग्रुप में रखा गया है। बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की नई सैलरी संरचना के तहत रिटेन की गई सूची को अंतिम रूप दे दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई ने एलीट A+ कैटेगरी को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जो अब तक तीनों फॉर्मेट खेलने वाले सुपरस्टार खिलाड़ियों के लिए आरक्षित मानी जाती थी। अब बोर्ड ने तीन-स्तरीय (थ्री-टियर) संरचना अपनाई है। इस बदलाव के साथ ही विराट कोहली और रोहित शर्मा को ग्रुप B में शामिल किया गया है। यह ‘डिमोशन’ उनके मौजूदा खेल प्रारूप को ध्यान में रखते हुए की गई है। दोनों ही खिलाड़ी अब टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट से दूर हैं और मुख्य रूप से वनडे फॉर्मेट पर ध्यान दे रहे हैं, जिस वजह से उन्हें शीर्ष ग्रुप में जगह नहीं मिली।

ग्रुप A में नई पीढ़ी को जगह
नई व्यवस्था में सबसे ऊपर ग्रुप A रखा गया है, जिसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जो एक से अधिक फॉर्मेट में अहम भूमिका निभा रहे हैं या राष्ट्रीय टीम की अगुवाई कर रहे हैं। इस एक्सक्लूसिव ग्रुप में सिर्फ तीन खिलाड़ियों को शामिल किया गया है—टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा।
बीसीसीआई की यह नई सूची ‘विरासत’ की बजाय वर्कलोड और मल्टी-फॉर्मेट उपलब्धता को प्राथमिकता देने की सोच को दर्शाती है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट्स की पूरी सूची इस प्रकार है:
ग्रुप A: शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा
ग्रुप B: रोहित शर्मा, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, वॉशिंगटन सुंदर, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, मोहम्मद सिराज, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर
ग्रुप C: अक्षर पटेल, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, आकाश दीप, ध्रुव जुरेल, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, नितीश कुमार रेड्डी, अभिषेक शर्मा, साई सुदर्शन, रवि बिश्नोई, ऋतुराज गायकवाड़
यह फेरबदल अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के नए दृष्टिकोण को दर्शाता है। 7 करोड़ रुपये वाली A+ कैटेगरी को हटाकर बीसीसीआई ने वित्तीय लाभ को मौजूदा योगदान से जोड़ने की कोशिश की है। भले ही यह फैसला सीनियर खिलाड़ियों के लिए वेतन में कटौती जैसा लगे, लेकिन इससे कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को प्रदर्शन और मौजूदा मैच भागीदारी के आधार पर अधिक पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाए रखने का संदेश जाता है।

