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बिहार चुनाव: नीतीश कुमार की बंपर जीत के पीछे क्या हैं 5 बड़े कारण? रुझानों से साफ-सरकार एनडीए की

Posted on November 14, 2025November 14, 2025 By Chhavi Singh

ST.News Desk

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों और नतीजों से अब तस्वीर लगभग साफ है—राज्य की सत्ता एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर जाती दिख रही है। एग्जिट पोल्स के अनुमानों को लगभग सच साबित करते हुए मतदाताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
सेहत, आयु और नेतृत्व क्षमता पर विपक्ष के सवाल उठने के बावजूद नीतीश कुमार जनता की पसंद बने रहे।

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी और तेजस्वी यादव की “तेजस्वी का प्रण” अभियान भी प्रभावी साबित नहीं हुआ।
तो आखिर क्या हैं इस बंपर जीत के बड़े कारण? आइए समझते हैं—

  1. नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा

इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा—क्या नीतीश कुमार दो दशक से अधिक लंबे कार्यकाल के बाद भी जनता के बीच उतने लोकप्रिय हैं?

नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा का असर गहरा है—

2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बने

अब तक 9 बार शपथ ले चुके

2020 के बाद ही 3 बार शपथ ली

और अब 10वीं बार शपथ लेने की तैयारी में

महागठबंधन की ओर से “नीतीश को CM चेहरा घोषित क्यों नहीं किया जा रहा” की रणनीति कुछ समय तक असरदार लगी।
हालाँकि, भाजपा ने स्पष्ट घोषणा की कि जीत के बाद “विधायक दल का नेता नीतीश ही होंगे”—और इस संदेश ने लहर को स्थिर किया।

नतीजों ने सिद्ध कर दिया कि नीतीश अब भी बिहार की राजनीति के केंद्रीय नेता हैं।

  1. रिकॉर्ड-ब्रेकिंग मतदान—सत्ता पक्ष के पक्ष में भारी लहर

इस बार मतदान दो चरणों में हुआ—

पहला चरण: 65.08%

दूसरा चरण: 69.20%

कुल मतदान: 67.13% (बिहार के इतिहास में सबसे ज़्यादा)

चुनावी इतिहास कहता है:

अधिक मतदान = या तो भारी सत्ता-विरोधी लहर, या एकतरफा सत्ता-पक्ष में वोटिंग।

इस बार दूसरी स्थिति दिखाई दी।

जदयू को पिछली बार 15.39% वोट मिले थे, जबकि इस बार 18% से अधिक, यानी 3%+ की बढ़ोतरी।
वोट शेयर में यह बढ़त सीटों में भी दिखी—
जदयू पिछली बार तीसरे स्थान पर थी, इस बार वह 30+ सीटों की बढ़त के साथ राजद से भी आगे निकल गई।

  1. महिलाओं के वोट—नीतीश का सबसे मजबूत सामाजिक आधार

पिछले डेढ़ दशक से बिहार की राजनीति में महिलाओं की भूमिका बेहद निर्णायक रही है—और इसमें नीतीश की नीतियों का बड़ा योगदान है—

साइकिल योजना

शराबबंदी

आरक्षण बढ़ोतरी

और इस चुनाव में—1.5 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता

मतदान के दौरान इसका स्पष्ट प्रभाव दिखा—

पहले चरण में पुरुषों से 7.48% ज़्यादा महिलाओं ने वोट किया

दूसरे चरण में 10.15% ज़्यादा

कई जिलों में 80% से अधिक महिलाओं ने वोट डाला—

किशनगंज: 88.57% (सबसे अधिक)

38 में से 37 जिलों में महिलाओं का मतदान पुरुषों से अधिक रहा

महिलाओं का यह अभूतपूर्व समर्थन एनडीए की जीत का निर्णायक आधार माना जा रहा है।

  1. बिखरा हुआ विपक्ष—सीट शेयरिंग की देरी ने किया नुकसान

महागठबंधन चुनाव के बिल्कुल अंतिम दिनों तक सीटों के बंटवारे में उलझा रहा।
कई सीटों पर दो-दो पार्टियों के उम्मीदवार आमने-सामने थे।

उधर, एनडीए में—

भाजपा और जदयू दोनों 101–101 सीटों पर पहले ही तय

कोई भ्रम नहीं, कोई असंतोष नहीं

महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी को CM और वीआईपी के मुकेश सहनी को डिप्टी CM घोषित किया गया, लेकिन—

मुस्लिम या दलित चेहरे को डिप्टी CM न बनाना

और सीट-शेयरिंग की अनिश्चितता
एनडीए ने इसका पूरा राजनीतिक लाभ उठाया।

  1. मोदी–नीतीश की संयुक्त छवि और ‘जंगलराज’ बनाम ‘सुशासन’ का मुकाबला

एनडीए का पूरा संदेश “डबल इंजन सरकार” पर केंद्रित था—
एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय स्तर की लोकप्रियता,
दूसरी तरफ नीतीश कुमार की प्रशासनिक छवि।

इसके मुकाबले महागठबंधन “जंगलराज की वापसी” के आरोप से पूरी तरह नहीं बच पाया।
राजद को यह पता था—
इसी वजह से पूरे प्रचार में लालू-राबड़ी के पोस्टर गायब रहे।
पोस्टरों में सिर्फ तेजस्वी दिखाई दिए।

चिराग पासवान और मोदी की केमिस्ट्री के चलते लोजपा (रामविलास) ने भी एनडीए को शहरी और युवा वोटरों में मजबूती दी।

किन नए चेहरों पर थी नजर?

  1. तेजस्वी यादव

राजद का पूरा भविष्य तेजस्वी पर टिका है।
लेकिन इस चुनाव में उनकी “नौकरियों वाला मुद्दा” युवा वोटरों में उतना प्रभावी नहीं रहा जितना वे मान रहे थे।

  1. प्रशांत किशोर (PK)

जनसुराज से उम्मीद थी कि वह कई सीटों पर खेल बिगाड़ सकती है। लेकिन रुझानों ने साफ कर दिया— जनसुराज अपने पहले बड़े चुनाव में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई।

निष्कर्ष: बिहार ने नीतीश पर फिर भरोसा जताया

एनडीए की भारी जीत यह संकेत देती है कि—

नीतीश की प्रशासनिक छवि

महिलाओं का मजबूत समर्थन

मोदी का राष्ट्रीय प्रभाव

और महागठबंधन की तैयारी में खामियां

—इन सबने मिलकर नीतीश कुमार के लिए एक रिकॉर्ड-तोड़ जनादेश तैयार किया।

बिहार, राष्ट्रीय

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