अमेरिका अगले हफ्ते ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Donald Trump प्रशासन ने संभावित हमले के कई सैन्य विकल्प तैयार कर लिए हैं और अब अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प को लेना है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेंटागन ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की विस्तृत योजना बनाई है
ST.News Desk
बड़े हवाई हमलों की तैयारी
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की तैयारी पूरी है। अधिकारियों के मुताबिक, हमले के विकल्पों में ईरान के सैन्य अड्डों, रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक शामिल हैं।
इस्फहान परमाणु साइट पर ग्राउंड ऑपरेशन का विकल्प
रिपोर्ट के अनुसार, एक विकल्प यह भी है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज को जमीन पर उतारकर ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र में मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम तक पहुंच बनाई जाए। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि ऐसा ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा होगा और इसमें भारी सैन्य नुकसान की आशंका है।
मिडिल-ईस्ट में भारी सैन्य तैनाती
अमेरिका ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में 50 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं। इसके अलावा दो एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से अधिक नेवी डेस्ट्रॉयर और बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भी क्षेत्र में मौजूद हैं। करीब 5 हजार मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2 हजार पैराट्रूपर्स को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
ट्रम्प-जिनपिंग में दो मुद्दों पर सहमति
Donald Trump और Xi Jinping के बीच ईरान संकट को लेकर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने माना कि मौजूदा युद्ध समाप्त होना चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहना चाहिए। हालांकि चीन ने युद्ध खत्म कराने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने के संकेत नहीं दिए।
BRICS देशों में मतभेद
नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच एक राय नहीं बन सकी। साझा बयान में कहा गया कि इस संघर्ष को लेकर सभी देशों की सोच अलग-अलग है और समाधान के तरीके पर मतभेद बने हुए हैं।
चीन की अपील- बातचीत ही समाधान
चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने अमेरिका और ईरान से बातचीत जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि होर्मुज संकट का हल स्थायी युद्धविराम और कूटनीति से ही संभव है। वांग यी ने कहा कि ताकत नहीं, बल्कि संवाद ही सही रास्ता है।
जर्मनी ने भी ईरान से बातचीत की मांग की
जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने कहा कि ईरान को तुरंत बातचीत की टेबल पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल रहनी चाहिए।

