प्रदीप कुमार सिंह
लखनऊ ब्यूरो (संचारटाइम्स.न्यूज)
लखनऊ: स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित नवचेतना केन्द्र के ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों ने भाग लिया और अपने अधिकारों, सम्मान तथा सरकारी सुविधाओं को लेकर व्यापक चर्चा की।

स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान : बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले, तहसील और ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी। साथ ही स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के अधिकारों की मांग को लेकर संबंधित सांसदों और विधायकों को नियमित रूप से ज्ञापन सौंपे जाएंगे। संस्था का कहना है कि अब स्वतंत्रता सेनानी परिवार एकजुट होकर अपनी आवाज सरकार तक मजबूती से पहुंचाएंगे, ताकि उनकी लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा समाप्त हो सके।
स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान : संस्था के महासचिव मनोज कान्त द्विवेदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक सेनानी परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी। स्वतंत्रता सेनानियों के निधन के बाद उनके परिवारों की ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जबकि उत्तराखंड, असम और पंजाब जैसे राज्यों में सेनानी परिवारों की अगली पीढ़ियों को पारिवारिक पेंशन, चिकित्सा सुविधा, परिवहन, टोल टैक्स में छूट सहित कई लाभ दिए जा रहे हैं।
स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान : उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नियमावली-1980 में संशोधन कर ‘स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी नियमावली-2026’ लागू की जाए। साथ ही सेनानी उत्तराधिकारियों को जिलाधिकारी कार्यालय से आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए जाएं। संस्था ने यह भी मांग उठाई कि पहले से रिक्त पड़ी दो एंग्लो-इंडियन सांसद सीटों को देशभर के स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षित किया जाए, जिससे लगभग 40 लाख उत्तर प्रदेश और करीब 2 करोड़ देशभर के सेनानी परिवारों की आवाज संसद तक पहुंच सके।
संस्था के उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में बने सेवा सदनों की स्थिति बेहद खराब है। सरकार को इन भवनों का पुनर्निर्माण एवं आधुनिकीकरण कराना चाहिए। जिन जिलों में सेवा सदन नहीं हैं, वहां नए सेवा सदनों का निर्माण कराया जाए। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय एमिनेंट कमेटी के गठन की भी मांग की। इसके साथ ही ग्राम प्रधान से लेकर सांसद स्तर तक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान : संस्था के अध्यक्ष अभय सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी परिवार अब अपने अधिकारों और सम्मान के लिए पूरी तरह जागरूक हो चुके हैं। यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो स्वतंत्रता सेनानी परिवार लोकतांत्रिक तरीके से एक नई राष्ट्रवादी राजनीतिक पार्टी का गठन कर चुनावी राजनीति में भागीदारी करेंगे और अपने अधिकार स्वयं प्राप्त करेंगे।
स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान : बैठक में झांसी से प्रवीण कुमार, उरई से पंकज पांचाल, गाजीपुर से शिवम, प्रयागराज से धर्मेंद्र मिश्रा, प्रतापगढ़ से विशुद्धानंद, कानपुर से अंकुर, कन्नौज से अशोक कुमार तथा उन्नाव से वंशगोपाल मिश्रा सहित कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सम्मान, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने तथा देश को और अधिक मजबूत एवं विकसित बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प दोहराया।
स्वतंत्रता सेनानी जन जागृति कल्याण संस्थान की बैठक कहाँ आयोजित हुई?
यह बैठक लखनऊ के हजरतगंज स्थित नवचेतना केन्द्र के ऑडिटोरियम में आयोजित की गई।
बैठक में प्रमुख मांगें क्या थीं?
संस्था ने स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी नियमावली 2026 लागू करने, पहचान पत्र जारी करने, पेंशन, चिकित्सा, परिवहन सुविधाएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की।
बैठक में क्या महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया?
निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जिले, तहसील और ब्लॉक स्तर पर हर महीने बैठक आयोजित कर सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे, ताकि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के अधिकारों की आवाज लगातार उठाई जा सके।

