लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में अपने परिवार की भूमिका को लेकर एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। मायावती ने कहा है कि पार्टी के हित और बहुजन समाज के मिशन को पारिवारिक रिश्तों से ऊपर रखा जाना चाहिए। अपने हालिया संदेश में उन्होंने आकाश आनंद, दीपिका आनंद और ईशान आनंद को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर विस्तार से बात की। मायावती ने अपने बयान में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन में जिम्मेदारी देते समय व्यक्तिगत रिश्तों की जगह पार्टी के हित, निष्ठा और काम को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, इसी सोच के आधार पर उन्होंने परिवार से जुड़े लोगों की राजनीतिक भूमिका को लेकर निर्णय लिया है।
आकाश आनंद को लेकर मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर कहा कि उन्हें पहले पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं, लेकिन बाद में उनके आचरण और पार्टी से जुड़े घटनाक्रमों के कारण उन्हें संगठन से अलग करने का फैसला लिया गया।
आकाश आनंद को 3 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह अलग किए जाने की घोषणा की। इस घटनाक्रम में आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक संन्यास भी चर्चा में रहा। मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में हैं। यह मायावती का आरोप है; आकाश आनंद की ओर से इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया है, यह अलग से देखा जाना महत्वपूर्ण है।
दीपिका आनंद को लेकर भी बदला रुख
मायावती ने परिवार में पार्टी की जिम्मेदारियों को लेकर अपने निर्णय पर दोबारा स्थिति स्पष्ट की है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार अब उन्होंने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को भी पार्टी की जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही है। इससे पहले 12 सितंबर के उनके बयान में दीपिका को अपने पिता आनंद कुमार की सहायता के लिए संभावित विकल्प के तौर पर बताया गया था। बाद के घटनाक्रम में यह रुख बदलता हुआ दिखाई दिया।
ईशान आनंद को लेकर क्या है फैसला?
मायावती ने आनंद कुमार के परिवार में ईशान आनंद को संगठन में जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने ईशान को लेकर भी साफ चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मायावती के अनुसार, यदि ईशान आनंद भी पार्टी के हितों के खिलाफ गंभीर गतिविधि में शामिल पाए जाते हैं, तो इसके बाद परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी की जिम्मेदारी देने के बजाय संगठन में काम कर रहे किसी समर्पित कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।
कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
मायावती ने अपने फैसले को समझाने के लिए BSP संस्थापक कांशीराम के राजनीतिक जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी और बहुजन समाज के हित को प्राथमिकता दी।मायावती ने इसी विचारधारा को अपने राजनीतिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी के संगठनात्मक काम में व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों से ऊपर उठकर काम करना जरूरी है।
डॉ. आंबेडकर के पत्र का भी किया उल्लेख
मायावती ने अपने फैसले के समर्थन में डॉ. भीमराव आंबेडकर के एक पुराने पत्र का उदाहरण भी दिया। उनके अनुसार, बाबा साहेब ने 23 फरवरी 1956 को अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को लिखे पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे। मायावती ने इस प्रसंग का उल्लेख यह समझाने के लिए किया कि सार्वजनिक या संगठनात्मक जिम्मेदारी में निजी रिश्तों से ऊपर संस्था और सार्वजनिक हित को रखा जाना चाहिए।
23 सितंबर को BSP की अहम बैठक
मायावती ने कहा है कि देश और जनहित से जुड़े मुद्दों के साथ पार्टी संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर 2026 को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। यह एक महीने के भीतर पार्टी की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी। इससे पहले 3 सितंबर को हुई बैठक के बाद आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था और 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से अलग किए जाने की घोषणा हुई थी।
‘बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार’—मायावती
अपने संदेश के अंत में मायावती ने कहा कि उनके लिए पूरा बहुजन समाज ही उनका परिवार है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक लक्ष्य बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए काम करना है। मायावती ने यह भी कहा कि संगठन और मिशन के हित में जरूरत पड़ने पर वह अपने रिश्तेदारों के संबंध में भी कड़े फैसले ले सकती हैं।

