₹25,000 वेतन सीमा के बाद कितनी हो सकती है पेंशन? 10 से 25 साल की नौकरी का पूरा कैलकुलेशन
नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है। सरकार के मुताबिक, इससे 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के सामाजिक सुरक्षा दायरे में आ सकते हैं।
क्या बदली EPFO की सीमा?
अब तक किसी प्रतिष्ठान में ₹15,000 से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी सामान्य तौर पर EPFO की अनिवार्य कवरेज के दायरे में नहीं आता था, हालांकि संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर अलग प्रावधान हो सकते हैं। नई व्यवस्था में यह सीमा बढ़कर ₹25,000 प्रति माह हो गई है। इसका मतलब है कि ₹15,000 से ₹25,000 के बीच वेतन पाने वाले पात्र नए कर्मचारियों को EPF, EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जाएगा।

51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा कवरेज
केंद्र सरकार के अनुसार इस फैसले से देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के अनिवार्य कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है। इससे उन्हें भविष्य निधि बचत, पेंशन और बीमा से जुड़े सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे, जो संबंधित योजना के नियमों के अनुसार लागू होंगे।
EPS Pension को लेकर क्या समझना जरूरी है?
EPS यानी Employees’ Pension Scheme में पेंशन की गणना अलग नियमों के तहत होती है। आम तौर पर पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा अवधि जैसे कारक इसमें महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए नई ₹25,000 की सीमा को सीधे हर कर्मचारी की पेंशन में 66.6 प्रतिशत बढ़ोतरी के बराबर मानना सही नहीं है। वास्तविक पेंशन किसी कर्मचारी की सदस्यता, योगदान, पेंशन योग्य सेवा, लागू नियमों और अन्य पात्रता शर्तों पर निर्भर करेगी। यानी ₹25,000 की नई सीमा का सबसे स्पष्ट असर उन कर्मचारियों पर है जो पहले ₹15,000 से अधिक वेतन के कारण EPFO की अनिवार्य कवरेज से बाहर रह सकते थे और अब नई सीमा के कारण इसके दायरे में आ सकते हैं।
EPFO में कंपनी और कर्मचारी का योगदान कैसे होता है?
EPF व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से योगदान होता है। नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPS और दूसरा हिस्सा EPF में जाता है। हालांकि वास्तविक योगदान और पेंशन की गणना संबंधित EPFO नियमों के अनुसार होती है। इसलिए केवल बेसिक सैलरी को देखकर किसी व्यक्ति की भविष्य की EPS पेंशन की निश्चित राशि बताना उचित नहीं होगा।
कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकार के मुताबिक, नई वेतन सीमा से EPFO की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा। नए पात्र कर्मचारियों को EPF बचत, EPS पेंशन और EDLI बीमा जैसी सुविधाओं तक पहुंच मिल सकती है। सरकार ने बताया है कि यह बदलाव औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को विस्तार देने के उद्देश्य से किया गया है। नई सीमा लागू करने के लिए EPFO और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे।
ध्यान रखें
अगर आपकी सैलरी ₹25,000 या उससे अधिक है, तो सिर्फ इस नई सीमा के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि आपकी EPS पेंशन निश्चित रूप से 66.6 प्रतिशत बढ़ जाएगी। EPFO कवरेज की नई सीमा और EPS पेंशन की वास्तविक गणना दो अलग-अलग बातें हैं।
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