- मौलाना साजिद रशीदी ने मां-बाप की देखभाल और वृद्धाश्रमों को लेकर बयान दिया.
- उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बच्चे अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ते.
- दिल्ली के वृद्धाश्रमों में रहने वालों की धार्मिक पहचान पर उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
मौलाना साजिद रशीदी ने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल को लेकर हिंदू और मुस्लिम परिवारों की तुलना की है. उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बच्चे अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ते. साथ ही, दिल्ली के वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों की धार्मिक पहचान को लेकर भी बयान दिया. इस बयान की खबर मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है.
रशीदी ने क्या कहा?
रशीदी ने कहा, “मुसलमान का बच्चा वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ता मां-बाप को. दिल्ली में जितने भी वृद्धाश्रम हैं, आप देखिएगा उसमें हिंदू हैं सब, मुसलमान नहीं हैं.”
यह रशीदी का दावा है. दिल्ली के सभी वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की धार्मिक पहचान से संबंधित प्रमाणित आंकड़ों के जरिए इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
बच्चों की परवरिश पर चर्चा के दौरान बयान
एबीपी लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, रशीदी बच्चों की संख्या और उनकी परवरिश को लेकर बोल रहे थे. इसी दौरान उन्होंने माता-पिता की देखभाल और वृद्धाश्रमों का जिक्र करते हुए दोनों समुदायों की तुलना की.
























