झारखंड हाईकोर्ट में परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजीएल मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है, जबकि JPSC की विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी CGL-2023 परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। New Indian Express और UNI की रिपोर्ट के मुताबिक, JSSC CGL मामले में 8 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हुई थी और JPSC मामले में 9 अक्टूबर को आगे की सुनवाई निर्धारित थी।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने के पीछे बताईं अनियमितताएं
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। सरकार की दलील थी कि CGL-2023 परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। सरकार ने सीआईडी जांच का हवाला देते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचने से परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी।
राज्य सरकार के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों और कथित अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने यह भी दलील दी कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष अभ्यर्थियों और कथित तौर पर अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना कठिन था। ये सरकार की ओर से अदालत में रखे गए तर्क हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
अभ्यर्थियों की ओर से क्या दलील दी गई?
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाए। उनकी ओर से दलील दी गई कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अभ्यर्थियों की पहचान करके बाकी अभ्यर्थियों के भविष्य पर विचार किया जाना चाहिए। इस तरह मामले में मुख्य विवाद यह है कि कथित गड़बड़ियों के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करना उचित था या नहीं।
JPSC की किन परीक्षाओं पर सुनवाई?
JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), फूड सेफ्टी ऑफिसर और अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ भी याचिकाएं दायर की गई हैं। इन मामलों में अदालत के समक्ष अलग-अलग पक्षों की दलीलें रखी जा रही हैं।
अब आगे क्या होगा?
JSSC CGL मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। इसका मतलब है कि अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन अंतिम आदेश अभी सुनाया जाना बाकी है। फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि परीक्षा रद्द करने के सरकारी निर्णय पर अदालत क्या रुख अपनाती है।
JPSC से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी रहने के कारण इन परीक्षाओं के भविष्य को लेकर भी अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी। अभ्यर्थियों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हाईकोर्ट के आधिकारिक आदेश और संबंधित आयोग की अधिसूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
























