Skip to content
  • X
  • Instagram
  • YouTube
  • Facebook
Sanchar Times

Sanchar Times

Hindi NEWS

  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राज्य
    • दिल्ली/NCR
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • हिमाचल
  • राजनीति
    • भाजपा
    • कांग्रेस
    • चुनाव
  • खेल
  • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • संपादकीय
  • सोशल मीडिया
  • Toggle search form
श्रेणियांराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया
होम पर वापस जाएंलाइफस्टाइल
brian

दिमाग के उस हिस्से का पता चला जिससे नेत्रहीन पहचानते हैं चेहरा

Posted on November 24, 2023November 24, 2023 By Sanchar Times News

वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के उस हिस्से का पता लगा लिया है, जिसका इस्तेमाल नेत्रहीन ‘फ्यूसीफॉर्म’ चेहरा क्षेत्र यानी बुनियादी चेहरों की पहचान करने के लिए करते हैं। यह ज्ञात तथ्य है कि नेत्रहीन लोग देखने की क्षमता नहीं होने की भरपाई कुछ हद तक अन्य इंद्रियों का उपयोग करके कर सकते हैं लेकिन अमेरिका स्थित जॉर्जटाउन विविद्यालय के एक अध्ययन से यह पता लगाया गया कि यह भरपाई किस हद तक होती है। विविद्यालय के तंत्रिका विज्ञान विभाग में प्रोफेसर जोसेफ रौसचेकर ने कहा, ‘हमारे अध्ययन ने एक तकनीकी उपकरण की सहायता से बुनियादी दृश्य पण्रालियों का श्रवण पण्रालियों में कूट लेखन करके देखने और सुनने के बीच भरपाई की क्षमता की सीमा का आकलन किया।

इस उपकरण को हम संवेदी प्रतिस्थापन उपकरण के रूप में संदर्भित करते हैं।’शोधकर्ताओं ने ‘पीएलओएस वन’ पत्रिका में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा कि नेत्रहीन लोग छवियों को ध्वनियों में अनुवादित करने वाले विशेष उपकरण का उपयोग करके एक बुनियादी ‘काटरून’ चेहरे को पहचान सकते हैं, जैसे कि एक खुश चेहरे वाला इमोजी। उन्होंने मस्तिष्क के उस क्षेत्र का पता लगाने के लिए कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद (रेजोनेंस) इमेजिंग (एफएमआरआई) का उपयोग किया जो देखने की क्षमता नहीं होने पर चेहरे की पहचान करने में मदद करता है।

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए छह नेत्रहीन और सीमित रूप से दृष्टिहीन 10 लोगों को इसमें शामिल किया, जिन्होंने ध्वनियों के माध्यम से चेहरों को पहचानना सीखने के लिए अभ्यास सत्र में भाग लिया था। रौसचेकर ने कहा कि अध्ययन के परिणामों से पता चलता है कि मस्तिष्क फ्यूसीफॉर्म चेहरा क्षेत्र की जिस प्रकार कल्पना करता है, वह दिखाई देने वाले वास्तविक चेहरों के अनुभव पर निर्भर नहीं होता बल्कि यह चेहरे के विन्यास की ज्यामिति पर निर्भर करता है, जिसे अन्य संवेदी तौर-तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है।

Post Views: 2
लाइफस्टाइल

Post navigation

Previous Post: मात्र 350 रुपए लूटने के लिए युवक को मार डाला
Next Post: टाइगर 3 ने 250 करोड़ की कमाई की

Special Report

  • AC LED TV
    1 अक्टूबर से AC, फ्रिज और LED TV महंगे हो सकते हैं, कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम
  • Pitra Paksha 2026
    Pitra Paksha 2026: पितृ पक्ष 26 या 27 सितंबर से? जानें भ्रम की असली वजह और सही तारीख
  • GENDER IDENTITY 1
    जेंडर आइडेंटिटी पर बढ़ती बहस: युवाओं, सोशल मीडिया और चिकित्सा से जुड़े सवाल
  • Ghaziabad News: सिद्धार्थ विहार में युवती गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
  • Ajmer News: इजरायली महिला पर्यटक से अभद्रता, वायरल वीडियो पर चार गिरफ्तार
  • एक्सप्रेसवे पर पलटा मछलियों से भरा कैंटर
  • खाने के बाद गैस और पेट फूलने की समस्या
  • दवा ₹2,700 की, MRP ₹27,000 पर सवाल

Sanchar Times

देश-दुनिया, राजनीति, बिजनेस, खेल और मनोरंजन की ताजा खबरें हिंदी में पढ़ें।

ज़रूरी लिंक

होम
हमारे बारे में
संपर्क करें
Privacy Policy
Disclaimer

प्रमुख श्रेणियां

राष्ट्रीय
राज्य
राजनीति
अंतर्राष्ट्रीय
खेल
मनोरंजन

हमसे संपर्क करें

प्रधान संपादक: Pankaj Kumar
कार्यालय: 190, Pratap Nagar, Mayur Vihar Phase-1, Delhi – 110091
ईमेल: sanchartimes.news@gmail.com
मीडिया संपर्क: media@sanchartimes.news

सोशल मीडिया पर जुड़ें

  • Facebook
  • YouTube
  • Instagram
  • X
  • WhatsApp

© Sanchar Times. All Rights Reserved.

Powered by PressBook WordPress theme

होमराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया