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ट्रंप की चेतावनी के बीच रूस से तेल खरीद पर नया समीकरण, भारत ने घटाई आयात, चीन ने बनाया रिकॉर्ड

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ST.News Desk

रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाए और रूस से रियायती तेल खरीदने वाले देशों को भारी टैरिफ की चेतावनी दी। भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा भी की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस बीच, जहां भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में कुछ कमी की है, वहीं चीन ने आयात बढ़ाकर नया रिकॉर्ड बना लिया है।

भारत पर टैरिफ की चेतावनी, फिर राहत

अमेरिकी प्रशासन ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को चेतावनी दी थी कि उन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। इसी क्रम में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की गई, हालांकि बाद में इसे वापस ले लिया गया। हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कुछ कम की है, जो बढ़ते पश्चिमी दबाव और व्यापारिक समीकरणों का परिणाम माना जा रहा है।

चीन ने बढ़ाई खरीद, बनाया रिकॉर्ड

अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद चीन ने फरवरी में रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीदा। माना जा रहा है कि यह लगातार तीसरा महीना है जब चीन के रूसी तेल आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। खासकर स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) रिफाइनर्स सस्ते रूसी तेल की जमकर खरीद कर रहे हैं।

वोरटेक्स एनालिटिक्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक फरवरी में रूस से चीन को रोजाना लगभग 2.07 मिलियन बैरल कच्चे तेल की शिपमेंट हुई, जो जनवरी के लगभग 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन से काफी अधिक है। वहीं, Kpler के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में यह आंकड़ा करीब 2.083 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि जनवरी में यह 1.718 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।

भारत की आयात में कटौती

दूसरी ओर, Kpler के डेटा के मुताबिक फरवरी में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 1.159 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया। नवंबर के बाद से चीन रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और बढ़ते कूटनीतिक दबाव के चलते भारत ने दो वर्षों में पहली बार नवंबर में रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय कमी दर्ज की थी।

रणनीतिक ऊर्जा संतुलन की लड़ाई

कुल मिलाकर, जहां अमेरिका रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं चीन सस्ते रूसी तेल का फायदा उठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक भंडार को मजबूत कर रहा है। भारत फिलहाल संतुलित रणनीति अपनाते हुए वैश्विक दबाव और ऊर्जा सुरक्षा के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश में है।


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