ST.News Desk
नई दिल्ली में आयोजित भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 का पहला संस्करण आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस समिट में नीति-निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और नवाचारकर्ताओं ने भाग लेकर पावर सेक्टर के भविष्य और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करने पर गहन चर्चा की।

समिट में व्यापक स्तर पर भागीदारी देखने को मिली, जिसमें 35,000 से अधिक प्रदर्शनी आगंतुक, 28 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश, 200 से अधिक कंपनियां (80+ स्टार्टअप्स सहित), 6,000 से अधिक प्रतिनिधि, 300 से अधिक वक्ता और 100 से अधिक सत्र शामिल रहे। यह इसकी वैश्विक अहमियत और व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित होकर भारत 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और पहले ही 50% से अधिक क्षमता का लक्ष्य पार कर चुका है। “वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड” जैसी पहलें वैश्विक ऊर्जा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह समिट अत्यंत सफल रहा और इसमें पावर सेक्टर के विभिन्न हितधारकों की प्रभावशाली भागीदारी देखने को मिली। उन्होंने विशेष रूप से स्टार्टअप्स की भागीदारी और उनके द्वारा लाए जा रहे नवाचारों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली एक साझा और आवश्यक संसाधन है, जो सभी आर्थिक क्षेत्रों और नागरिकों के लिए जरूरी है। सौभाग्य योजना के माध्यम से देश के हर कोने तक बिजली पहुंचाने में सफलता मिली है।
यह समिट भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहां नीतिगत दिशा, वैश्विक सहयोग और नवाचार के जरिए एक मजबूत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख पावर सेक्टर की नींव रखी गई।

