
ST.News Desk : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का एक वरिष्ठ पदाधिकारी कई राज्यों में अपना मतदाता पंजीकरण स्थानांतरित कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने यह दावा एक पोस्ट के माध्यम से सोशल मीडिया मंच ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर किया। तेजस्वी यादव के अनुसार, भाजपा के बिहार प्रदेश संगठन महासचिव भीखू भाई दलसानिया, जो मूल रूप से गुजरात निवासी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, ने हाल ही में गुजरात की मतदाता सूची से अपना नाम हटाकर बिहार में मतदाता के रूप में पंजीकरण करवा लिया है।

“बिहार का विशेष प्रोजेक्ट सौंपा गया है”
तेजस्वी यादव ने कहा, “यह भीखू भाई दलसानिया जी हैं। वे गुजरात के निवासी हैं, लेकिन भाजपा ने उन्हें बिहार का विशेष प्रोजेक्ट सौंपा है। वे पहले अमित शाह के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करते थे, अब बिहार में मतदाता बन गए हैं। बिहार चुनाव समाप्त होने के बाद वे संभवतः किसी अन्य राज्य में भी मतदाता बन सकते हैं।”
“कितनी बार और कहां-कहां किया मतदान?”
यादव ने दलसानिया से यह स्पष्ट करने की मांग की कि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में कितनी बार और कितने राज्यों में मतदान किया है। तेजस्वी का आरोप है कि यह एक सुनियोजित ‘वोट ट्रांसफर रणनीति’ है, जिसे भाजपा कथित तौर पर आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए अपना रही है।
“बिना मकान नंबर, गुजराती में नाम”
राजद नेता ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार की मतदाता सूची में दलसानिया का न तो कोई स्पष्ट पता है, न ही मकान नंबर, जिससे उनकी पहचान सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, “बिहार की मतदाता सूची में उनका नाम हिंदी में नहीं, बल्कि गुजराती भाषा में दर्ज है, जिससे हिंदी भाषी मतदाताओं के लिए उन्हें पहचानना और सवाल उठाना मुश्किल हो सके।”
“चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल”
तेजस्वी यादव ने अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे अब हर विवरण पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बार किसी भी हाल में “वोट चोरी” को सफल नहीं होने देंगे। तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए ये आरोप न सिर्फ चुनावी नैतिकता, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यदि उनके दावों में तथ्य हैं, तो यह मामला चुनाव आयोग के संज्ञान में लाकर गहन जांच और स्पष्टीकरण की मांग करता है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आनी अभी बाकी है।
