राज्य में लगातार सामने आ रहे वित्तीय घोटालों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अब पलामू में भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं की आशंका ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं
ST.News Desk
पलामू में शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप : पलामू जिले में शिक्षा विभाग के भीतर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय जानकारी के अनुसार कई योजनाओं की राशि समय पर खर्च नहीं हो पाई, जिससे वित्तीय वर्ष 2025–26 में बड़ी रकम लैप्स हो गई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बिल पास, भुगतान नहीं-फर्जी भुगतान की आशंका
बीईईओ और अकाउंटेंट द्वारा बिल प्रस्तुत किए जाने के बावजूद संविदा एजेंसियों को भुगतान नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर बिना कार्य पूर्ण हुए फर्जी बिल के आधार पर भुगतान किए जाने की आशंका भी सामने आई है, जो एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
यूटिलिटी सर्टिफिकेट में देरी से बढ़ा संदेह
योजनाओं से जुड़े यूटिलिटी सर्टिफिकेट समय पर जमा नहीं किए गए, जिससे सरकारी फंड के उपयोग पर पारदर्शिता नहीं रही। इससे योजनाएं प्रभावित हुईं और धन के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है।
फंड उपयोग में पारदर्शिता पर सवाल
सीआरपी, बीआरपी, सीआरसी फंड और प्रशिक्षण मद में राशि के उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। विभागीय स्तर पर पारदर्शिता की कमी ने अनियमितताओं के संदेह को और गहरा कर दिया है।
उच्च अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
डीईओ, डीपीओ और डीडीओ स्तर पर पर्याप्त सत्यापन के बिना भुगतान किए जाने की आशंका जताई गई है। नियमों के अनुसार भुगतान से पहले सभी स्तरों पर जांच जरूरी होती है, लेकिन इसमें लापरवाही की बात सामने आ रही है।
वित्त मंत्री ने दिए राज्यव्यापी जांच के आदेश
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त सचिव को सभी जिलों में जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही गृह सचिव और डीजीपी को भी अपने स्तर पर जांच करने को कहा गया है।
सिंडिकेट की भूमिका से इनकार नहीं
सरकार को आशंका है कि यह केवल अलग-अलग मामले नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है। तीनों जिलों में पुलिस विभाग से जुड़े मामलों का सामने आना इस शक को और मजबूत करता है।
डीडीओ की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
वित्त मंत्री ने यह भी सवाल उठाया है कि निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) की जिम्मेदारी अब तक तय क्यों नहीं की गई। भुगतान प्रक्रिया में डीडीओ की भूमिका सबसे अहम होती है, ऐसे में उनकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
हजारीबाग घोटाला: 10 साल में 16 करोड़ का खेल
हजारीबाग में सामने आए घोटाले ने पूरे राज्य को चौंका दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि शंभू कुमार नामक व्यक्ति ने पिछले 10 वर्षों में 16 करोड़ रुपये से अधिक का हेर-फेर किया। उसने अपने रिश्तेदारों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए और फर्जी तरीके से लोगों को बाल सिपाही दिखाकर भुगतान कराया।
इस मामले में अब तक 21 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनकी जांच जारी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक घोटाले की कुल राशि 28 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। जांच एजेंसियां अब आरोपितों की संपत्ति और नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

