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k kavita

के कविता को मिलेगी बेल या काटेंगी जेल? HC ने फैसला सुरक्षित रखा

Posted on May 28, 2024 By Sanchar Times News

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों से जुड़े दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में बीआरएस नेता के कविता द्वारा दायर जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान, के कविता के वकील ने दोनों मामलों में जमानत के लिए दलील दी, जिसमें जांच एजेंसियों के साथ उनके सहयोग और किसी भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल न होने पर जोर दिया गया। कानूनी टीम ने उनकी राजनीतिक स्थिति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में बीआरएस नेता के. कविता की जमानत याचिका का दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया और कहा कि उनकी रिहाई से गहरी साजिश का पता लगाने के लिए आगे की जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ईडी ने कविता की जमानत याचिका पर अपने जवाब में दलील दी कि तेलंगाना की बीआरएस नेता एक अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन पर गंभीर आर्थिक अपराध करने का आरोप है। उसने दलील दी कि कविता सबूतों के साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। संघीय जांच एजेंसी ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि कविता ने अन्य लोगों के साथ साजिश रची और 100 करोड़ रुपये की रिश्वत देने में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।


न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कविता के वकील की दलीलें सुनीं और मामले को 27 मई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। कविता ने निचली अदालत के छह मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सीबीआई के भ्रष्टाचार मामले के साथ-साथ ईडी के धन शोधन मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कविता के वकील ने दलील दी कि आबकारी नीति मामले में 50 आरोपियों में से वह अकेली महिला हैं और उन्होंने अदालत से बीआरएस नेता के महिला होने के नाते उन्हें जमानत देने पर विचार करने का आग्रह किया। सह-अभियुक्त अरुण रामचंद्रन पिल्लई द्वारा दायर एक अन्य याचिका को लेकर सीबीआई ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि भ्रष्टाचार मामले में कविता की कथित भूमिका के लिए जून के पहले सप्ताह तक उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जाने की संभावना है। कविता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने कहा कि बीआरएस नेता के खिलाफ धन शोधन मामले में पर्याप्त सबूत हैं।

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