हैदर अली, रोहतास ब्यूरो चीफ
बिहार के रोहतास जिले के सासाराम से अपराध की एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस की फुल यूनिफॉर्म पहनकर हाईवे पर अवैध वसूली और बड़ी लूट की साजिश रच रहे पांच शातिर अपराधियों को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। शिवसागर थाना पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) पर पखनारी के पास इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पकड़े गए सभी आरोपी खुद को 2017 बैच का दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) बताकर ठगी और वसूली का गिरोह चला रहे थे।
बरामद हथियार और सामग्री
असली पुलिस ने छापेमारी के दौरान इन जालसाजों के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और अन्य सामान जब्त किया है:
- अवैध हथियार: 2 देसी कट्टा और 4 जिंदा कारतूस।
- नकली हथियार: हूबहू असली जैसी दिखने वाली एक खिलौना पिस्टल।
- वाहन: अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक गाड़ी, जिस पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ है।
- वर्दी: सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) और कमांडो की पूरी ड्रेस और बैज।
वारदात का तरीका (Modus Operandi)
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से रोहतास और कैमूर जिलों के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था। ये लोग रात के अंधेरे में NH-19 पर पुलिस की वर्दी में तैनात हो जाते थे। वहां से गुजरने वाले ट्रक ड्राइवरों और अन्य वाहन चालकों को डरा-धमकाकर भारी अवैध वसूली करते थे और लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देते थे।
गिरफ्तार अपराधियों की कुंडली
शिवसागर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर रोहतास जिले के 3 और कैमूर जिले के 2 अपराधियों को दबोचा है:
- प्रवीण सिंह (मुख्य सरगना): निवासी- कोनार, शिवसागर (रोहतास) — यह दरोगा की फुल यूनिफॉर्म में था।
- दिवाकर कुमार सिंह: निवासी- अमाव गांव, सवार थाना (कैमूर) — यह भी दरोगा की फुल यूनिफॉर्म में था और इसका पुराना आपराधिक इतिहास है।
- इसरार आलम: निवासी- करगहर (रोहतास) — कमांडो की ड्रेस में था और इसका भी पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है।
- वीरेंद्र कुमार: निवासी- कुदरा (कैमूर) — कमांडो की वर्दी में गिरफ्तार।
- रजनीश कुमार: निवासी- छितराटॉढ, चेनारी (रोहतास) — कमांडो की वर्दी में गिरफ्तार।
पुलिस का आधिकारिक बयान
सासाराम के एसडीपीओ (SDPO) गौरव यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस टीम ने पूरी सतर्कता और तत्परता बरतते हुए इस पूरे गिरोह को दबोचा है। खुद को 2017 बैच का दरोगा बताने वाले इन शातिरों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इनके अन्य नेटवर्क और पिछली वारदातों का भी खुलासा किया जा सके।
(बाइट: गौरव यादव, एसडीपीओ, सासाराम)

