
रोहतास/संचार टाइम्स

सासाराम: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पोस्ट सासाराम के निरीक्षक प्रभारी संजीव कुमार को सूचना मिली कि एक आदिवासी व्यक्ति पैदल पंडित दीनदयाल उपाध्याय (मुगलसराय) से झारखंड के दुमका स्थित अपने गांव की ओर लौट रहा है। इस दौरान दयालपुर गांव के निवासी अभय कुमार नामक युवक ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे रोका और सहायता हेतु जानकारी दी।
सूचना मिलने पर RPF सासाराम की टीम तुरंत हरकत में आई और उक्त व्यक्ति को अपनी सुरक्षा में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना नाम विनोद हेम्ब्रम (उम्र 45 वर्ष), पिता मिसिल हेम्ब्रम, निवासी मोडायम, जिला दुमका (झारखंड) बताया।
मजदूरी नहीं मिली, इसलिए पैदल निकला घर के लिए
विनोद हेम्ब्रम ने बताया कि वह मुगलसराय स्थित एक अगरबत्ती बनाने वाली फैक्ट्री में करीब एक महीने से कार्यरत था, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने के कारण उसने फैक्ट्री छोड़ दी। वह एक ठेकेदार के माध्यम से अपने गांव से काम के लिए लाया गया था। जब किसी ने उसकी मदद नहीं की, तो उसने पैदल ही अपने घर लौटने का निर्णय लिया।
संस्थाओं के सहयोग से सुरक्षित व्यवस्था
आरपीएफ द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए “सुराजे” संस्था से संपर्क किया गया। संस्था ने तत्परता दिखाते हुए दुमका जिला प्रशासन और उसके गांव में स्थिति की सूचना दी। इसके बाद ग्राम साथी संस्था को विनोद हेम्ब्रम की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई और उसे संस्था के सुपुर्द किया गया। साथ ही, उसके परिजनों को भी सूचना दी गई ताकि वे स्थिति से अवगत हो सकें और आगे की प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।
मानवता की मिसाल बनी RPF सासाराम
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि RPF केवल रेलवे सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि संकट में फंसे यात्रियों और आम लोगों की मदद में भी आगे बढ़कर मानवता का परिचय दे रही है। निरीक्षक संजीव कुमार और उनकी टीम का यह प्रयास सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
