
हैदर अली, रोहतास ब्यूरो संचार टाइम्स

बिहार में चुनावी वर्ष के बीच जन सुराज की “बिहार बदलाव यात्रा” ने ज़ोर पकड़ लिया है। इस यात्रा के तहत 12 अगस्त को चेनारी (रोहतास) में जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर की उपस्थिति में एक विशाल जनसभा आयोजित की जा रही है। आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और स्थानीय कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
सासाराम में कार्यकर्ताओं की एकजुटता
बृहस्पतिवार को सासाराम में जन सुराज से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक कार्यक्रम के दौरान शक्ति प्रदर्शन किया। इस मौके पर तिलौथू के पूर्व जिला पार्षद और जन सुराज नेता रविंद्र कुमार द्विवेदी ने पुराने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा, “अब तक जो भी सरकारें आई हैं, उन्होंने आम जनता को बरसाती मेंढक की तरह सिर्फ चुनावी मौसम में आश्वासन दिया है। चुनाव जीतने के बाद वे दोबारा मुड़कर देखने तक नहीं आते।” उन्होंने आरोप लगाया कि सासाराम जैसे महत्वपूर्ण शहर में यातायात जाम जैसी समस्या का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया, जबकि जन सुराज इसे लेकर मास्टर प्लान तैयार कर रहा है।

जनता अब बरसाती वादों से ऊब चुकी है
रविंद्र द्विवेदी ने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि महंगाई, भ्रष्टाचार और मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व और नीतियों से हल होंगी। “इस बार जनता का मिजाज जन सुराज की ओर झुक चुका है। अब जाति की नहीं, जनता की सोच बिहार में बदलाव लाएगी।”

बिहार बदलाव यात्रा बनी जन आंदोलन की शक्ल
जन सुराज की बिहार बदलाव यात्रा न केवल राजनीतिक रैलियों तक सीमित है, बल्कि इसे जनता के बीच सीधा संवाद और जमीनी मुद्दों की पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर के नेतृत्व में यह यात्रा बिहार के कोने-कोने में पहुंच रही है, जहां वे सीधे लोगों से संवाद कर रहे हैं और समस्या आधारित समाधान मॉडल पर बात कर रहे हैं।
12 अगस्त की चेनारी जनसभा पर टिकी निगाहें
आगामी 12 अगस्त को रोहतास जिले के चेनारी में आयोजित होने वाली विशाल जनसभा पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह सभा न केवल जन सुराज के जनाधार का प्रदर्शन करेगी, बल्कि बिहार की राजनीति में इसकी गंभीर दावेदारी का संकेत भी देगी।
बिहार में बदलाव की मांग और जनता की उम्मीदों के बीच जन सुराज की बिहार बदलाव यात्रा तेजी से जन समर्थन जुटा रही है। प्रशांत किशोर की रणनीति अब केवल विश्लेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में सक्रिय है।
12 अगस्त की चेनारी सभा इस यात्रा का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
