देश के कई हिस्सों में एलपीजी संकट गहराता नजर आ रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं और कई जगहों पर 2-3 दिन इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ST.News Desk
देश के अलग-अलग राज्यों से सामने आ रही तस्वीरें एलपीजी संकट की गंभीरता को दिखा रही हैं। कई जगहों पर लोग सुबह 3 बजे से ही गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। अंधेरे में टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में अपनी बारी का इंतजार करते लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।
कई शहरों और कस्बों में लोगों को सिलेंडर पाने के लिए दो से तीन दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई लोगों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। इससे लोगों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। कुछ लोग तो अपनी नौकरी या रोजमर्रा के काम छोड़कर भी गैस एजेंसियों की लाइनों में लगे हुए हैं, ताकि किसी तरह घर के लिए सिलेंडर मिल सके।
एलपीजी की कमी का असर खास तौर पर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर ज्यादा पड़ रहा है। कई घरों में खाना बनाने की समस्या खड़ी हो गई है। कुछ जगहों पर लोग मजबूरी में लकड़ी या कोयले से खाना बनाने की बात कह रहे हैं, जिससे हालात और कठिन हो गए हैं।
इस बीच विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे संभावित “फूड इमरजेंसी” की चेतावनी से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि अगर जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो देश के कई हिस्सों में भोजन से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।
हालांकि सरकार का दावा इन आशंकाओं से अलग है। पेट्रोलियम मंत्रालय और प्रधानमंत्री की ओर से कहा गया है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि सप्लाई चेन को सामान्य करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
इन दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर लोग अब भी गैस सिलेंडर के लिए घंटों और कई बार दिनों तक इंतजार करने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सप्लाई और मांग के बीच पैदा हुई इस खाई को कब तक भरा जा सकेगा।

