तेहरान: Strait of Hormuz – दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। ईरान की सेना ने साफ कहा है कि अमेरिका युद्ध, सैन्य हमले या दबाव के जरिए इस रास्ते को अपनी शर्तों पर नहीं खोल सकता। होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए अमेरिका को ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करना होगा और युद्ध समाप्त करने से जुड़े समझौते की शर्तों का पालन करना होगा।

Strait of Hormuz – ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने और अमेरिका को इस समुद्री रास्ते का ‘गार्जियन’ यानी संरक्षक बताने के बाद आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में ट्रंप के लिए ‘मालिक’ शब्द के बजाय ‘गार्जियन’ या रास्ते पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया गया है।
युद्ध से नहीं खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
Strait of Hormuz – ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अकरमिनिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका के युद्ध, आक्रामकता या शत्रुतापूर्ण कार्रवाई से दोबारा नहीं खोला जा सकता। उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते को खोलने का एकमात्र तरीका ईरान के अधिकारों का सम्मान और युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते का पूरी तरह पालन करना है।
Strait of Hormuz Crisis- अकरमिनिया ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज में देश के अधिकारों की रक्षा आखिरी सांस तक करेंगे और अपने रुख से जरा भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह बयान बताता है कि आने वाले दिनों में इस समुद्री रास्ते पर सैन्य और कूटनीतिक तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
ट्रंप ने जहाजों पर 20 फीसदी टोल लगाने का किया ऐलान
Strait of Hormuz Crisis- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू करेगा। इसके साथ ही उन्होंने इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से उनके कार्गो की कीमत का 20 फीसदी शुल्क वसूलने की बात कही है।

Strait of Hormuz Crisis : ट्रंप ने अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ‘गार्जियन’ बताया है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि यह शुल्क जहाजों को सुरक्षा देने और समुद्री रास्ते पर आवाजाही सुनिश्चित करने के बदले वसूला जाएगा। हालांकि 20 फीसदी टोल लगाने की योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, व्यापार लागत और इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर फिर लगाई नाकाबंदी
Strait of Hormuz Crisis- अमेरिका की नई नाकाबंदी मुख्य रूप से ईरानी जहाजों और ईरान से कारोबार करने वाले जहाजों को निशाना बनाने के लिए बताई गई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि दूसरे देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया जाएगा, लेकिन उनसे अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था के बदले शुल्क लिया जा सकता है।
Strait of Hormuz रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यह कदम क्षेत्र में फिर शुरू हुए सैन्य हमलों और कारोबारी जहाजों पर हुए हमलों के बाद उठाया है। दूसरी ओर, ईरान का आरोप है कि अमेरिका पहले हुए युद्ध-विराम या समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने और समुद्री यातायात को खतरे में डालने का आरोप लगा रहे हैं।
नए शिपिंग रूट पर भी विवाद
Strait of Hormuz ईरानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की ओर से तय की गई नेविगेशन व्यवस्था को स्वीकार करने के बावजूद एक अलग शिपिंग रूट स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ईरान चाहता है कि जहाज उसके तट के नजदीक उत्तरी रास्ते और उसकी ओर से तय नियमों के तहत गुजरें।
Strait of Hormuz वहीं अमेरिका ओमान के करीब दक्षिणी हिस्से से जहाजों की आवाजाही और अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना चाहता है। इस तरह विवाद केवल रास्ता खोलने तक सीमित नहीं है। असली टकराव इस बात पर है कि जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कौन करेगा और उनसे किसी तरह का शुल्क वसूलने का अधिकार किसके पास होगा।
होर्मुज पर किसी एक देश का मालिकाना हक नहीं
Strait of Hormuz स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। ईरान और ओमान इसके तटीय देश हैं, लेकिन किसी एक देश को पूरे जलमार्ग का मालिक नहीं माना जाता। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत दूसरे देशों के जहाजों को ऐसे जलमार्गों से निर्बाध आवागमन का अधिकार मिलता है।
Strait of Hormuz अमेरिका और ईरान दोनों ने समुद्री कानून से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के 1982 के समझौते को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है, लेकिन निर्बाध समुद्री आवागमन के कई सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय परंपरागत कानून का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी भी देश की ओर से पूरे रास्ते पर एकतरफा नियंत्रण या मनमाना शुल्क लगाने का दावा कानूनी विवाद पैदा कर सकता है।
ईरानी सेना ने जनता के समर्थन की सराहना की
Strait of Hormuz तेहरान के दक्षिणी इलाके में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए अकरमिनिया ने पिछले चार महीनों के दौरान सशस्त्र बलों को मिले ईरानी जनता के समर्थन की सराहना की। उन्होंने सैन्य संघर्ष में मारे गए ईरानी नेताओं और वरिष्ठ कमांडरों को भी याद किया।
अकरमिनिया ने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल बाहरी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का रुख केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और आर्थिक अधिकारों से जुड़ा मामला है।
जहाजों की आवाजाही में आई बड़ी गिरावट
Strait of Hormuz अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पर भी पड़ा है। एसोसिएटेड प्रेस की तथ्य-जांच रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध से पहले इस रास्ते से रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे। हाल के एक रविवार को यह संख्या घटकर केवल 14 रह गई।
जहाजों की आवाजाही में इस बड़ी गिरावट से कच्चे तेल, LNG, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। जहाजरानी कंपनियां संघर्ष वाले इलाके में प्रवेश करने से पहले सुरक्षा और बीमा लागत का आकलन कर रही हैं।
कच्चे तेल की कीमतों पर बढ़ा दबाव
Strait of Hormuz स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फारस की खाड़ी के कई बड़े तेल और गैस उत्पादक देश इसी रास्ते से अपना निर्यात करते हैं। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई। बाजार को डर है कि जहाजों पर हमला, अमेरिकी नाकाबंदी या ईरान की ओर से रास्ता बंद किए जाने की स्थिति में तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
20 फीसदी टोल लागू करना आसान नहीं
विशेषज्ञों ने ट्रंप की 20 फीसदी टोल योजना को बेहद आक्रामक और व्यावहारिक रूप से मुश्किल बताया है। जहाजों के कार्गो की कुल कीमत पर 20 फीसदी शुल्क लगाने से आयातित तेल, गैस और दूसरे सामान की लागत अचानक बहुत बढ़ सकती है।
Strait of Hormuz इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सभी जहाजों से यह शुल्क किस कानूनी आधार पर वसूलेगा। जहाजरानी कंपनियों ने भी ऐसे टोल को अनुचित बताया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा वास्तविक शुल्क व्यवस्था से ज्यादा ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।
बातचीत ही निकाल सकती है रास्ता
ईरान ने संकेत दिया है कि वह सैन्य दबाव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन उसकी शर्त है कि अमेरिका पहले युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते का पालन करे। वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान को कारोबारी जहाजों पर हमले रोकने और समुद्री रास्ते को निर्बाध रूप से खोलने की जरूरत है।
Strait of Hormuzफिलहाल दोनों देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका सुरक्षा और नौसैनिक ताकत के नाम पर टोल वसूलना चाहता है, जबकि ईरान तटीय देश होने के कारण रास्ते के संचालन में अपने अधिकारों को मान्यता दिलाना चाहता है। दोनों पक्ष पीछे नहीं हटे तो होर्मुज का विवाद केवल समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर दुनियाभर के तेल बाजार, महंगाई और व्यापार पर दिखाई दे सकता है।

