crossorigin="anonymous"> Paper Leak Protest: सरकार-CJP की बैठक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा संगठन

Paper Leak Protest : पेपर लीक विवाद पर सरकार-CJP की बातचीत, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का एलान

Paper Leak Protest: सरकार-CJP की बैठक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा संगठन
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Paper Leak Protest: सरकार-CJP की बैठक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा संगठन

ST.News Desk

Paper Leak Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को अहम बातचीत हुई। करीब दो घंटे चली बैठक में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों पर चर्चा की गई।

Paper Leak Protest

Paper Leak Protest : सरकार ने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शनिवार दोपहर तक का समय मांगा गया है। दूसरी ओर CJP ने साफ कर दिया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने तक जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

सरकार और CJP के बीच करीब दो घंटे बैठक

Paper Leak Protest : केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह बातचीत में शामिल हुए। CJP का प्रतिनिधित्व संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत दिल्ली के वीपी हाउस यानी विट्ठलभाई पटेल हाउस में शुरू हुई। बाद में CJP ने बैठक के नतीजों की जानकारी कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में मीडिया के सामने रखी।

धर्मेंद्र प्रधान ने खुद 1997 में पेपर लीक के खिलाफ विरोध किया था।

Paper Leak Protest : बैठक करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली। CJP प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को अपनी मांगों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े सुझावों का लिखित ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि केवल दोषियों को सजा देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

Paper Leak Protest : जेपी नड्डा ने बैठक के बाद कहा कि CJP नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है। उनके मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने तीन मुख्य मांगों के साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव रखे हैं। सरकार इन मांगों पर आंतरिक चर्चा के बाद CJP प्रतिनिधियों से दोबारा बातचीत करेगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP

बैठक के बाद CJP ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी सबसे अहम और गैर-समझौतावादी मांग है। संगठन के अनुसार, सरकार ने इस मांग पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।

Paper Leak Protest

Paper Leak Protest : CJP नेताओं ने कहा कि सरकार यदि धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं लेती या उन्हें पद से नहीं हटाती है तो आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का तर्क है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होना राहत की बात है, लेकिन इससे आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक जंतर-मंतर पर धरना जारी रहेगा।

छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग

Paper Leak Protest : CJP ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR तथा कानूनी मामले वापस लेने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।

20 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने CJP से जुड़े करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग आक्रामक हो गए, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई को अत्यधिक बल प्रयोग बताया है।

CJP का कहना है कि सरकार ने निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR और कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम औपचारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग

संगठन ने कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े दबाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग भी रखी है।

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका के मुताबिक, सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सैद्धांतिक सहमति जताई है। मुआवजे की रकम, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय सरकार की ओर से किया जाना बाकी है।

सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन

इस घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त कर दिया। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन पढ़कर सुनाए।

इसके बाद वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला किया। उनके अनशन का संबंध NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों से था। हालांकि, उनके अनशन खत्म करने के बाद भी CJP ने स्पष्ट किया कि उसका धरना और देशव्यापी अभियान जारी रहेगा।

बैठक की जगह को लेकर भी हुआ था विवाद

सरकार ने इससे पहले CJP प्रतिनिधियों को जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत करने का प्रस्ताव दिया था। CJP ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि वार्ता जंतर-मंतर या किसी तटस्थ जगह पर होनी चाहिए।

इसके बाद सरकार ने तटस्थ स्थान पर बैठक की मांग मान ली। बैठक स्थल को लेकर सहमति बनने के बाद शुक्रवार को दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। सरकार की इस पहल को आंदोलन खत्म कराने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पेपर लीक रोकने के लिए कानून पहले से लागू

पेपर लीक मामलों में 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपए या उससे अधिक के आर्थिक दंड से जुड़े प्रावधान पहली बार अब नहीं लाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून पारित किया था, जो 21 जून 2024 से लागू है।

इस कानून में संगठित पेपर लीक अपराध के लिए पांच से 10 साल तक की जेल और कम से कम एक करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है। परीक्षा सेवा प्रदान करने वाली एजेंसियों पर भी एक करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

मौजूदा आंदोलन के बीच सरकार फास्ट ट्रैक अदालतों, तय समय के भीतर मामलों के निपटारे और कानून को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए संशोधन या अतिरिक्त प्रशासनिक कदमों पर विचार कर रही है। इसलिए इसे पूरी तरह नया पेपर लीक कानून कहने के बजाय मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की तैयारी कहना अधिक सही होगा।

अब शनिवार की बैठक पर नजर

सरकार और CJP के बीच बातचीत शुरू होने के बावजूद सबसे बड़ा गतिरोध धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बना हुआ है। FIR और मुआवजे की मांगों पर औपचारिक आदेश जारी होने तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जाएगी।

अब सभी की नजर शनिवार दोपहर होने वाली अगली बातचीत पर रहेगी। सरकार यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग खारिज करती है तो जंतर-मंतर का आंदोलन और तेज हो सकता है। वहीं, कोई बीच का रास्ता निकलने पर कई दिनों से जारी टकराव को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।


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