- गाजियाबाद की इंदिरापुरम पुलिस और स्वाट/सर्विलांस टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया.
- पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद को NIA और CBI का वरिष्ठ अधिकारी बताकर नोटिस सेटल कराने के नाम पर रकम मांग रहे थे.
- शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 50 लाख रुपये लिए जा चुके थे, जबकि 15 करोड़ रुपये की मांग किए जाने का आरोप है.
गाजियाबाद: खुद को NIA और CBI का वरिष्ठ अधिकारी बताकर एक कारोबारी से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है. ट्रांस हिंडन जोन की स्वाट/सर्विलांस टीम और थाना इंदिरापुरम पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस का दावा है कि आरोपी एक नोटिस को सेटल कराने के नाम पर कारोबारी को डराकर उससे 15 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे. शिकायतकर्ता से अलग-अलग समय पर करीब 50 लाख रुपये लिए जाने का आरोप भी लगाया गया है.
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने 1 लाख 92 हजार रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद करने की बात कही है. मामले की जानकारी डीसीपी सिटी/ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य और थाना प्रभारी अजय चौधरी की मौजूदगी में दी.
नोटिस से शुरू हुआ पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, इंदिरापुरम निवासी विकास मित्तल ने 1 सितंबर 2026 को थाने में शिकायत दी थी. शिकायत में उन्होंने अनिल प्रताप सिंह, अनिकेत उर्फ कबीर सिंह, सिद्धार्थ जैन, सलमान और अंकित द्विवेदी पर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर रुपये मांगने का आरोप लगाया.
पुलिस जांच में सामने आया कि विकास मित्तल की दिल्ली स्थित फर्म ‘ए टू जेड’ के नाम पर NIA/CBI से जुड़ा एक नोटिस आया था. फर्म के मैनेजर योगेश ने इस नोटिस की चर्चा अपने परिचित सलमान से की.
आरोप है कि सलमान ने योगेश को भरोसा दिलाया कि उसकी विभिन्न सरकारी विभागों के बड़े अधिकारियों से पहचान है और वह मामले को सेटल करा सकता है.
खुद को बड़ा अधिकारी बताकर डराने का आरोप
पुलिस के मुताबिक इसके बाद सलमान और सिद्धार्थ जैन के जरिए अनिल प्रताप सिंह ने पहले योगेश और बाद में फर्म के मालिक विकास मित्तल से संपर्क किया.
आरोप है कि अनिल प्रताप सिंह ने खुद को उच्च पद पर तैनात अधिकारी बताते हुए कारोबारी को डराया. पुलिस के अनुसार कारोबारी से कहा गया कि अगर नोटिस का निस्तारण नहीं कराया गया तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और उनकी फर्म को भी नुकसान होगा.
इसके बाद मामले को कथित तौर पर सेटल कराने के बदले 15 करोड़ रुपये की मांग की गई.
पुलिस का कहना है कि डर और दबाव के चलते शिकायतकर्ता ने अलग-अलग मौकों पर रकम दी. रुपये लेने के लिए अनिल प्रताप सिंह ने कथित तौर पर अपने बेटे अनिकेत उर्फ कबीर और अंकित द्विवेदी को भेजा था.
CCTV और मैनुअल इनपुट से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद थाना इंदिरापुरम में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. इसके बाद पुलिस ने मैनुअल इनपुट, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ाई.
पुलिस के अनुसार 2 सितंबर 2026 को कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
ये तीन आरोपी हुए गिरफ्तार
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें 36 वर्षीय अंकित द्विवेदी, 64 वर्षीय अनिल प्रताप सिंह और 34 वर्षीय सिद्धार्थ जैन शामिल हैं.
अंकित द्विवेदी दिल्ली के वसंतकुंज इलाके का रहने वाला बताया गया है. अनिल प्रताप सिंह ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सिद्धार्थ जैन दिल्ली के पीतमपुरा इलाके का निवासी है.
दो आरोपी अभी फरार
पुलिस के मुताबिक मामले में अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान फिलहाल फरार हैं. उनकी तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं.
इंदिरापुरम थाना प्रभारी अजय चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है. साथ ही फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है.

