झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन 21वें दिन भी जारी है. JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने 15 अगस्त को रांची में ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, कुछ परीक्षाओं को रद्द करना और कथित गड़बड़ियों की CBI या राज्य के बाहर के रिटायर्ड जजों से स्वतंत्र जांच कराना शामिल है.
- JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन 21वें दिन में पहुंच गया है.
- प्रदर्शनकारी 15 अगस्त को रांची में ‘तिरंगा यात्रा’ निकालेंगे और CBI जांच समेत कई मांगों पर अड़े हैं.
- 10 अगस्त के विधानसभा मार्च में हिंसा को लेकर 300 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज हुई है और पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर रही है.
21वें दिन भी जारी JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन
ST.News Desk
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन शुक्रवार, 14 अगस्त को 21वें दिन में प्रवेश कर गया. रांची में JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में ज्यादा पारदर्शिता, कई परीक्षाओं को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि जांच CBI से कराई जाए या फिर झारखंड के बाहर के रिटायर्ड जजों का पैनल गठित किया जाए.
15 अगस्त को रांची में ‘तिरंगा यात्रा’
आंदोलन के बीच छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को रांची में ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने का फैसला किया है. JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच का कहना है कि इस यात्रा के जरिए आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा. इससे एक दिन पहले भी प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे रहे.
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होना जरूरी है. छात्रों का आरोप है कि कथित अनियमितताओं के कारण योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. प्रदर्शनकारियों ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की मांग को अपने आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है.

10 अगस्त की हिंसा पर 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR
आंदोलन के बीच 10 अगस्त को विधानसभा की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर भी विवाद जारी है. रांची पुलिस ने इस मामले में 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ विधानसभा थाने में FIR दर्ज की है. पुलिस के मुताबिक मामला निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने से जुड़ा है.
रांची SP पारस राणा के मुताबिक FIR विधानसभा मार्च के दौरान हुई घटनाओं को लेकर दर्ज की गई है. वहीं DSP हटिया नीरज कुमार ने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है. हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर रही है.
झड़प में 14 पुलिसकर्मी घायल
पुलिस के मुताबिक 10 अगस्त के टकराव में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. पुलिस का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया.
दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाने वाले अभ्यर्थियों पर बल प्रयोग किया गया. इस घटना के बाद आंदोलन और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है.
‘असली छात्रों को निशाना न बनाए प्रशासन’
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेता रवींद्र पासवान ने FIR को लेकर प्रशासन से अपील की है कि वास्तविक छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना न बनाया जाए.
पासवान ने कहा कि अगर प्रशासन ने हिंसा करने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है तो मंच को इस पर आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी निर्दोष छात्र के खिलाफ FIR नहीं होनी चाहिए.
देवेंद्र नाथ महतो की सेहत को लेकर चिंता
इस आंदोलन के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM के नेता देवेंद्र नाथ महतो की सेहत को लेकर भी चिंता बनी हुई है. 14 अगस्त तक उनकी भूख हड़ताल का 13वां दिन था. विधानसभा मार्च में शामिल होने के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
महतो ने अस्पताल प्रशासन से प्रदर्शन स्थल पर लौटने की अनुमति भी मांगी है. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक भूख हड़ताल पर बैठे चार अन्य छात्रों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है.
सरकार का क्या है कहना?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि उनकी सरकार भर्ती परीक्षाओं में सुधार को लेकर प्रतिबद्ध है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का भरोसा भी दिया है. सरकार का दावा है कि छात्रों की कई मांगों पर कदम उठाए गए हैं और बातचीत के जरिए बाकी मुद्दों का समाधान किया जा सकता है. दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी CBI जांच और JSSC से जुड़ी अपनी प्रमुख मांगों पर अब भी कायम हैं.
इस बीच राज्य की CID ने JPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज की है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसी अब तक पूर्व JPSC चेयरपर्सन एल. खियांग्ते समेत 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.
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