सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर फिर उठे सवाल
दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI की FIR दर्ज होने के बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बिहार बीजेपी के नेता और पूर्व मंत्री नीरज सिंह बबलू ने दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या का मामला थी और दिशा सालियान की मौत से इसका संबंध हो सकता है। हालांकि, यह नीरज सिंह बबलू का दावा है, स्थापित न्यायिक निष्कर्ष नहीं। मामले की सच्चाई CBI की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से तय होगी।
दिशा सालियान की मौत की जांच को लेकर हालिया घटनाक्रम ने वर्ष 2020 में हुई सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में 13 सितंबर 2026 को FIR दर्ज की। इसके बाद बिहार बीजेपी नेता नीरज सिंह बबलू ने इस मामले को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जोड़ते हुए अपनी पुरानी मांग और दावे दोहराए।
नीरज सिंह बबलू का कहना है कि दिशा सालियान की मौत की जांच में यदि वास्तविक तथ्य सामने आते हैं, तो इससे सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े सवालों पर भी रोशनी पड़ सकती है। उन्होंने दावा किया कि दोनों घटनाओं के बीच संबंध की बात वह पहले से उठाते रहे हैं।
हालांकि, इस दावे को फिलहाल जांच एजेंसी या अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश देते समय कहा था कि प्रारंभिक पुलिस जांच में कई गंभीर विसंगतियां थीं और मामले की विस्तृत जांच जरूरी है। अदालत ने किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई निष्कर्ष नहीं दिया था।
बीजेपी नेता नीरज सिंह बबलू ने क्या कहा?
नीरज सिंह बबलू ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के समय से ही वह इसे हत्या का मामला मानते रहे हैं। उनके मुताबिक, दिशा सालियान की मौत की जांच अगर उस समय आगे बढ़ती तो संभव है कि सुशांत की मौत से जुड़े कुछ सवालों के जवाब भी उसी दौरान मिल जाते। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने नहीं आने दिया गया। नीरज सिंह बबलू के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
बीजेपी नेता ने कहा कि अब दिशा सालियान मामले की CBI जांच शुरू होने से उन्हें उम्मीद है कि जांच के दौरान सभी पहलुओं की पड़ताल होगी और यदि कोई आपराधिक भूमिका सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
क्या हुआ था दिशा सालियान के मामले में?
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। वह मनोरंजन उद्योग में काम करती थीं और सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर भी रही थीं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत इसके कुछ दिन बाद 14 जून 2020 को मुंबई स्थित उनके आवास पर हुई थी।
दोनों घटनाओं के समय में नजदीकी होने के कारण सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में दोनों मामलों को जोड़कर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन किसी दावे और जांच में सामने आए प्रमाण के बीच अंतर रखना जरूरी है।
अब CBI द्वारा दिशा सालियान की मौत की जांच शुरू किए जाने से इस मामले के पुराने रिकॉर्ड, गवाहों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की दोबारा पड़ताल हो सकती है।
FIR में किन आरोपों की जांच होगी?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार CBI की FIR में आपराधिक साजिश, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, सबूत गायब करने तथा अपराधियों को बचाने के लिए गलत रिकॉर्ड तैयार करने जैसे आरोपों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। CBI ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
एक महत्वपूर्ण बात: अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में FIR में नामों को लेकर अलग विवरण प्रकाशित हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों ने FIR में कुछ लोगों के नाम/भूमिका की जांच का उल्लेख किया है। इसलिए Sanchar Times की खबर में किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी घोषित करने से पहले आधिकारिक FIR और CBI के रिकॉर्ड को आधार बनाना जरूरी होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
दिशा सालियान मामले में CBI जांच का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रारंभिक जांच में सामने आई विसंगतियों को देखते हुए विस्तृत जांच की जरूरत बताई थी। अदालत ने कहा था कि पुलिस की जांच कई सवालों का जवाब देने के बजाय और सवाल खड़े करती है।
दूसरी ओर, सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर वर्षों से अलग-अलग दावे और सवाल सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में दिशा सालियान मामले की नई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्य इस पूरे घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
किसे फायदा या नुकसान हो सकता है?
इस स्तर पर किसी व्यक्ति या पक्ष को फायदा अथवा नुकसान होने की बात निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा। जांच में यदि कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसका प्रभाव संबंधित व्यक्तियों और मामले से जुड़े पक्षों पर पड़ सकता है।
किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी केवल आरोप या राजनीतिक बयान के आधार पर तय नहीं होती। जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और अदालत की प्रक्रिया ही यह निर्धारित करेगी कि किसी के खिलाफ मामला बनता है या नहीं।
आगे क्या होगा?
अब CBI इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। इसके साथ ही संबंधित लोगों के बयान, घटनास्थल से जुड़े तथ्य और पहले की जांच में सामने आए साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक CBI ने औपचारिक जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जांच आगे बढ़ने के साथ यदि कोई नया तथ्य या ठोस साक्ष्य सामने आता है तो CBI उसके आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल नीरज सिंह बबलू का सुशांत सिंह राजपूत की मौत को हत्या बताने वाला बयान एक राजनीतिक नेता का दावा है, जांच से सिद्ध तथ्य नहीं।

