सुधा मूर्ति के मुताबिक पति-पत्नी के बीच बहस होना असामान्य नहीं है, लेकिन गुस्से के बाद दोनों किस तरह एक-दूसरे को समझते हैं, यही रिश्ते को मजबूत बनाता है
हर शादी की कहानी अलग होती है। किसी रिश्ते में हंसी-मजाक ज्यादा होता है तो कहीं छोटी-छोटी बातों पर बहस भी हो जाती है। लेकिन क्या पति-पत्नी के बीच कभी झगड़ा न होना ही खुशहाल शादी की निशानी है? समाजसेवी और लेखिका सुधा मूर्ति ने इस सवाल पर अपनी राय साझा करते हुए कहा है कि शादी में मतभेद होना अपने आप में गलत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि पति-पत्नी उन मतभेदों को किस तरह संभालते हैं।
हर बात पर एक जैसी सोच जरूरी नहीं
सुधा मूर्ति के मुताबिक शादी में दो अलग-अलग व्यक्तित्व साथ रहते हैं। ऐसे में हर मुद्दे पर दोनों की राय एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। छोटी-छोटी बातों को लेकर असहमति या बहस होना सामान्य है। हालांकि, उनका मानना है कि हर बहस को बड़ी लड़ाई में बदलने से बचना चाहिए। कई बार सामने वाले की बात सुन लेना, कुछ देर शांत रहना और जरूरत पड़ने पर थोड़ा समय देना रिश्ते को बिगड़ने से रोक सकता है।
गुस्से में शांत रहना जरूरी
सुधा मूर्ति ने अपनी शादी का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उनके पति एन. आर. नारायण मूर्ति गुस्से में होते हैं, तो वह उसी समय बहस करने से बचती हैं। इसी तरह जब वह नाराज होती हैं, तो उनके पति भी शांत रहने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक अगर दोनों एक ही समय पर गुस्से में अपनी बात मनवाने की कोशिश करेंगे, तो छोटी सी बात भी बड़ा विवाद बन सकती है। इसलिए पहले खुद को शांत करना और उसके बाद बातचीत करना रिश्ते के लिए बेहतर तरीका हो सकता है।

पार्टनर को बदलने की कोशिश न करें
सुधा मूर्ति का कहना है कि दुनिया में कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। हर व्यक्ति में कुछ खूबियां होती हैं तो कुछ कमियां भी होती हैं। शादी का मतलब सामने वाले को अपनी पसंद के मुताबिक बदलना नहीं, बल्कि उसकी अच्छाइयों और कमियों को समझते हुए उसे स्वीकार करना है। उन्होंने पति या पत्नी की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से करने से भी बचने की सलाह दी। खासतौर पर पत्नी की तुलना यह कहकर करना कि मां ज्यादा अच्छा खाना बनाती थीं, रिश्ते में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है।
घर की जिम्मेदारी दोनों की
कामकाजी पति-पत्नी के लिए सुधा मूर्ति ने घर की जिम्मेदारियों को मिलकर निभाने की बात कही। उनके मुताबिक अगर दोनों नौकरी करते हैं तो खाना बनाने, बच्चों की देखभाल और घर संभालने जैसी जिम्मेदारियों में भी दोनों की भागीदारी होनी चाहिए। रिश्ते में हर चीज का हिसाब रखने के बजाय एक-दूसरे की मदद करना और जरूरत पड़ने पर कुछ बातों को छोड़ देना भी जरूरी है।
हर बहस जीतना जरूरी नहीं
सुधा मूर्ति की बातों का एक अहम हिस्सा यह है कि शादी में हर बहस जीतना जरूरी नहीं है। कई बार चुप रहना, थोड़ा समय देना और बाद में शांत मन से बात करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उनके मुताबिक मजबूत रिश्ता सिर्फ इस बात से नहीं बनता कि पति-पत्नी के बीच कभी विवाद न हो। बल्कि यह इस बात से बनता है कि दोनों मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करें, समझें और साथ खड़े रहें।
यानी रिश्ते की मजबूती का पैमाना सिर्फ यह नहीं है कि पति-पत्नी कितनी बार झगड़ते हैं, बल्कि यह भी है कि झगड़े के बाद वे एक-दूसरे के करीब कैसे लौटते हैं।
यह भी पढ़ें : शराब पीने के बाद दवा लेना कितना खतरनाक? इन दवाओं के साथ बढ़ सकता है लिवर डैमेज और ब्लीडिंग का खतरा

