ससुर की हत्या की साजिश के आरोप में जेल भेजी गई शालू मिनोचा को पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया
कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल में बंद उनकी बहू शालू मिनोचा सोमवार शाम 22 दिन बाद जेल से बाहर आ गईं। जेल से रिहा होने के बाद शालू अपने भाई से लिपटकर रो पड़ीं। इसके बाद वह बिना किसी से बातचीत किए कार से लखनऊ स्थित अपने मायके के लिए रवाना हो गईं। उनका बेटा श्रीजय भी लखनऊ में है।
सात सितंबर को भेजी गई थी जेल
विनीत मिनोचा की हत्या की साजिश के आरोप में पुलिस ने सात सितंबर को शालू समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद की विवेचना में पुलिस के सामने उनके पति सुभ्रत की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए। इसके बाद शालू की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

विवेचक ने कोर्ट में दाखिल की अंतिम रिपोर्ट
सोमवार को कल्याणपुर इंस्पेक्टर एवं विवेचक केशव कुमार तिवारी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। विवेचक ने केस डायरी के साथ दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि विवेचना के दौरान शालू मिनोचा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। विवेचक ने शालू के न्यायिक अभिरक्षा रिमांड को निरस्त करने का भी अनुरोध किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने केस डायरी के पर्चा संख्या-17 का अवलोकन किया। इसमें विनीत मिनोचा की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम दिलाने में उनके बेटे सुभ्रत की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आने का उल्लेख था। वहीं, शालू के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने या हत्या कराने के संबंध में कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि विवेचना में हत्या की धारा में शालू की नामजदगी की पुष्टि नहीं होती है।
50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहाई
कोर्ट ने विवेचक के प्रार्थना पत्र को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। इसके साथ ही शालू मिनोचा को 50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर तत्काल रिहा करने के आदेश दिए गए।
शालू के जेल से बाहर आने के बाद वह अपने भाई के साथ लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित मायके के लिए रवाना हो गईं।
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