बैलेट पेपर से चुनाव की मांग पर सपा और बसपा साथ, अखिलेश बोले- सभी सीटें जीतने पर भी EVM का विरोध जारी रहेगा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रुख में समानता दिखाई दी है। बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव में सभी सीटें जीत जाए, तब भी EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान की मांग जारी रखेगी।
मायावती ने उठाया EVM पर सवाल
मायावती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि हर मतदाता को इस बात का भरोसा होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार या पार्टी को वोट दिया है, उसका मत उसी के पक्ष में दर्ज और गिना गया है। उनके मुताबिक चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के मन में संदेह पैदा होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से EVM के इस्तेमाल का विरोध करती रही है और इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई थी। उन्होंने VVPAT व्यवस्था का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं होने से उनकी आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं। ये मायावती के राजनीतिक दावे हैं।
अखिलेश यादव ने किया समर्थन
अखिलेश यादव ने मायावती की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अगर अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों में बैलेट पेपर से चुनाव हो सकते हैं, तो भारत में भी ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सपा चुनाव में सभी सीटें जीत भी जाए, तब भी EVM के खिलाफ अपना रुख नहीं बदलेगी। अखिलेश ने EVM में कथित हेरफेर की तुलना साइबर धोखाधड़ी से की और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने निर्वाचन आयोग में बदलाव और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने से जुड़े अपने राजनीतिक विचार भी सामने रखे।
चुनावी अनियमितताओं पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। ये आरोप अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए हैं और इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जमीन और सरकार पर अखिलेश का हमला
सपा अध्यक्ष ने किसानों की जमीन के अधिग्रहण को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और भाजपा को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने सरकारी जमीन और तालाबों पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया तथा सरकार द्वारा माफिया से जब्त की गई 84 हजार हेक्टेयर जमीन से संबंधित सवाल किया। उन्होंने मदरसों, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। शिक्षामित्रों की स्थिति सुधारने और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की बात कही।
मायावती ने लोकतांत्रिक भरोसे का मुद्दा उठाया
मायावती ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मतदान के जरिए अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है और अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें मतदाता को अपने वोट के सही दर्ज होने और गिने जाने पर कोई संदेह न रहे। मायावती ने चुनाव आयोग से EVM को लेकर उठ रहे संदेहों को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखने की मांग की है।
यूपी चुनाव से पहले EVM बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले EVM और बैलेट पेपर का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। फिलहाल सपा और बसपा दोनों ही EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच व्यापक राजनीतिक गठजोड़ या चुनावी समझौते की घोषणा इस मुद्दे से अलग विषय है; उपलब्ध बयानों से इतना स्पष्ट है कि EVM के सवाल पर दोनों नेताओं का रुख समान है।
मुख्य बातें
- मायावती ने EVM का इस्तेमाल बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की।
- अखिलेश यादव ने मायावती की मांग का समर्थन किया।
- अखिलेश ने कहा कि सभी सीटें जीतने पर भी सपा EVM का विरोध जारी रखेगी।
- दोनों नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं के भरोसे का मुद्दा उठाया।
- अखिलेश ने मतदाता सूची और चुनावी अनियमितताओं को लेकर भी आरोप लगाए।
- मायावती ने EVM और VVPAT व्यवस्था को लेकर अपनी पुरानी आपत्तियां दोहराईं।

