Gold ETF में सितंबर में निवेश 71% बढ़ा, लेकिन सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। जानिए निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति।
सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का रुझान गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) की ओर बढ़ा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में गोल्ड ETF में शुद्ध निवेश बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 2,597 करोड़ रुपये था। यानी एक महीने में निवेश में करीब 71 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दिलचस्प बात यह है कि कीमतों में नरमी के बीच निवेशकों ने गोल्ड ETF में ज्यादा पैसा लगाया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक सोने को केवल तेजी से मुनाफा कमाने के साधन के रूप में नहीं, बल्कि अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के विकल्प के तौर पर भी देख रहे हैं।
गोल्ड ETF में लगातार बढ़ा निवेश
AMFI के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में गोल्ड ETF में निवेश का रुझान उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत रहा है।
| महीना | शुद्ध निवेश |
|---|---|
| अप्रैल 2026 | ₹3,040 करोड़ |
| मई 2026 | -₹725 करोड़ |
| जून 2026 | ₹3,443 करोड़ |
| जुलाई 2026 | ₹1,559 करोड़ |
| अगस्त 2026 | ₹2,597 करोड़ |
| सितंबर 2026 | ₹4,451 करोड़ |
स्रोत: AMFI द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े।
सितंबर में निवेश बढ़ने से पता चलता है कि कीमतों में गिरावट के दौरान भी निवेशकों का एक वर्ग सोने में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहा है। हालांकि, केवल निवेश बढ़ने को इस बात का संकेत नहीं माना जा सकता कि सोने की कीमतें जल्द ही फिर से तेजी पकड़ लेंगी।
सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
कीमती धातुओं की कीमतों पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की संभावनाओं और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता का असर पड़ता है।
सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली होने से गिरावट आ सकती है। वहीं, चांदी पर निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उद्योगों में चांदी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में औद्योगिक मांग कमजोर होने या कंपनियों द्वारा पहले से जमा स्टॉक का इस्तेमाल करने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंता बढ़ा सकती हैं। यदि महंगाई के कारण अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए चुनौती बन सकती है।हालांकि, सोने और चांदी की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए किसी एक वजह को गिरावट का अकेला कारण मानना सही नहीं होगा।
गिरावट के बावजूद गोल्ड ETF में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
गोल्ड ETF ऐसे निवेशकों को सोने की कीमतों से जुड़ा निवेश उपलब्ध कराते हैं, जो भौतिक सोना खरीदने, रखने और उसकी सुरक्षा की चिंता से बचना चाहते हैं। इन्हें शेयर बाजार के माध्यम से खरीदा-बेचा जा सकता है।
निवेशक गोल्ड ETF में निवेश करने के कुछ प्रमुख कारणों पर विचार करते हैं:
- पोर्टफोलियो में विविधता: शेयर और अन्य निवेशों के साथ सोना रखने से पोर्टफोलियो का जोखिम संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
- अनिश्चितता के समय विकल्प: वैश्विक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता के दौर में कुछ निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं।
- भौतिक सोने की जरूरत नहीं: ETF के जरिए निवेश करने पर घर में सोना रखने जैसी सुरक्षा संबंधी चिंता नहीं रहती।
- चरणबद्ध निवेश: कुछ निवेशक बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय समय के साथ छोटी रकम निवेश करना पसंद करते हैं।
फिर भी, गोल्ड ETF की कीमतें भी गिर सकती हैं। इनमें निवेश करने से निश्चित मुनाफे या पूंजी की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेश का फैसला जल्दबाजी में करने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।
अगर निवेश का उद्देश्य लंबी अवधि में पोर्टफोलियो को संतुलित करना है, तो कुछ निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार सोने में सीमित हिस्सेदारी रखने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने की उम्मीद से निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। कीमतें गिरने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि वे तुरंत बढ़ने लगें। बाजार में आगे और गिरावट, लंबे समय तक सीमित दायरे में कारोबार या फिर तेजी—तीनों संभावनाएं बनी रह सकती हैं।
एकमुश्त निवेश या SIP, क्या है बेहतर तरीका?
बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता होने पर कुछ निवेशक चरणबद्ध तरीके से निवेश करना पसंद करते हैं। नियमित अंतराल पर तय रकम निवेश करने से अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी होती है और खरीद की औसत लागत प्रभावित होती है। हालांकि, इससे नुकसान से बचने की गारंटी नहीं मिलती। एकमुश्त निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि निवेशक को निकट भविष्य में उस पैसे की जरूरत तो नहीं है। आपातकालीन जरूरतों के लिए रखी रकम को बाजार के जोखिम में डालना उचित नहीं होगा। गोल्ड ETF चुनते समय उसके खर्च, कारोबार की तरलता, खरीद-बिक्री के अंतर और अपने कुल पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी पर भी ध्यान देना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे अहम बात?
सोने को रातों-रात अमीर बनाने वाली योजना के रूप में देखना सही रणनीति नहीं है। इसका इस्तेमाल पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम संतुलित करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन निवेश की मात्रा व्यक्ति के लक्ष्य, समयावधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए। कीमतों में गिरावट को अपने आप में खरीदारी का संकेत मानने के बजाय बाजार की परिस्थितियों और अपनी वित्तीय जरूरतों का आकलन करना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।
नोट: यह लेख सामान्य वित्तीय जानकारी के उद्देश्य से है, व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं। निवेश से पहले संबंधित योजना के दस्तावेज और जोखिम की जानकारी जरूर पढ़ें।






















