नई दिल्ली: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है।
सरदार पटेल को आधुनिक भारत का शिल्पकार और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का प्रतीक बताते हुए उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया। देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं भी दी गईं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से आजादी के बाद देशी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत की नींव रखने में अहम योगदान दिया।
रियासतों के एकीकरण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
आजादी के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक देशी रियासतों का एकीकरण था। सरदार पटेल ने अपने राजनीतिक कौशल और दृढ़ संकल्प से इस चुनौती का सामना किया। उनके नेतृत्व में रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और देश की एकता को मजबूत आधार मिला।
किसानों के अधिकारों के लिए किया संघर्ष
सरदार पटेल का योगदान केवल देश के एकीकरण तक सीमित नहीं था। खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह में उनकी भूमिका ने उन्हें किसानों के बीच लोकप्रिय बनाया। उन्होंने किसानों के अधिकारों और उनके हितों के लिए संघर्ष किया। बारडोली सत्याग्रह के दौरान ही उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।
प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान
सरदार पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि देश की एकता, प्रशासनिक मजबूती और सुशासन के लिए एक सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश
सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन त्याग, समर्पण, राष्ट्रसेवा और एकता का प्रतीक है। उनकी जयंती पर देश उनके आदर्शों को याद कर रहा है। राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश देशवासियों को राष्ट्रीय अखंडता बनाए रखने और एक मजबूत, समृद्ध तथा एकजुट भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता है।






















