CJI Surya Kant News: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। दोनों नेता 12 अक्टूबर को चुनावी प्रक्रिया, कथित वोट चोरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई ने इसके पीछे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े अहम कारण बताए हैं।
क्यों नहीं हुई मुलाकात?
‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं को बताया कि जिन मुद्दों पर वे चर्चा करना चाहते हैं, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित
विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, उनसे संबंधित मामले पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं। ऐसे में अलग से मुलाकात के जरिए उन पर चर्चा करना उचित नहीं माना गया। संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने या इस तरह के मुद्दों पर निर्देश देने की सीमा है। सीजेआई ने इसी संवैधानिक व्यवस्था का हवाला दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि यदि नेताओं को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा या किसी मुद्दे पर न्यायिक राहत चाहिए, तो वे उचित याचिका के जरिए अदालत का रुख कर सकते हैं।
संबंधित मामलों पर जल्द सुनवाई
रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह के मुद्दों से जुड़े मामलों पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित थी। ऐसे में विपक्षी नेताओं की ओर से दायर की जाने वाली याचिका पर भी संबंधित मामलों के साथ सुनवाई की जा सकती है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेता चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया था कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बढ़ रहा है और उन्होंने मौजूदा स्थिति को ‘अघोषित आपातकाल’ जैसा बताया था।
विपक्षी नेताओं की योजना सीजेआई को ज्ञापन सौंपने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उनका ध्यान आकर्षित करने की थी। लेकिन मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद अब इन मुद्दों को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उठाने का रास्ता खुला है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संबंधित मामलों की सुनवाई पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी प्रक्रिया, SIR और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों में अदालत क्या रुख अपनाती है।
सीजेआई द्वारा मुलाकात का समय नहीं देना इन मुद्दों पर विपक्ष के आरोपों को सही या गलत ठहराने वाला फैसला नहीं है। इन दावों पर न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
























