Skip to content
  • X
  • Instagram
  • YouTube
  • Facebook
Sanchar Times

Sanchar Times

Hindi NEWS

  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राज्य
    • दिल्ली/NCR
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • हिमाचल
  • राजनीति
    • भाजपा
    • कांग्रेस
    • चुनाव
  • खेल
  • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • संपादकीय
  • सोशल मीडिया
  • Toggle search form
श्रेणियांराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया
होम पर वापस जाएंराष्ट्रीय
monsoon

सुपर अल नीनो का खतरा! 197 जिलों पर मंडरा रहा सूखे का संकट, मॉनसून और महंगाई दोनों पर असर

Posted on June 13, 2026June 13, 2026 By Sanchar Times News

ST.News Desk

नई दिल्ली: देश में इस साल मॉनसून पर सुपर अल नीनो का साया गहराता दिख रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां जुलाई से सितंबर के बीच चरम पर पहुंच सकती हैं, जिससे भारत में मॉनसूनी बारिश प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। सरकार ने ऐसे 197 जिलों की पहचान की है, जहां इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि संभावित सूखे और कम वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए राज्यों के साथ मिलकर आपातकालीन कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान अल नीनो के और मजबूत होने की आशंका जताई है।

जुलाई-सितंबर में दिखेगा सबसे ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार जुलाई से सितंबर का समय भारत में सबसे अधिक वर्षा का होता है, लेकिन अल नीनो के प्रभाव से इस अवधि में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। IMD ने इस साल के मौसमी वर्षा अनुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत (LPA) के करीब 90 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जून में कुछ क्षेत्रों में हुई अच्छी प्री-मॉनसून बारिश वास्तविक तस्वीर नहीं दिखाती। असली चुनौती अगस्त और सितंबर में सामने आ सकती है, जब वातावरण में नमी की कमी के कारण वर्षा में गिरावट देखने को मिल सकती है।

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक वैश्विक जलवायु पैटर्न है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है और दुनिया के कई हिस्सों में मौसम असामान्य हो जाता है।

अल नीनो के दौरान समुद्र के ऊपर बहने वाली व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर फैल जाता है। इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ता है और अक्सर वर्षा में कमी दर्ज की जाती है।

खेती और खाद्य महंगाई पर बढ़ेगा दबाव

भारत की अधिकांश खरीफ खेती मॉनसून पर निर्भर करती है। ऐसे में कम बारिश का सीधा असर धान, दालें, तिलहन, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का और बाजरा जैसी फसलों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो वाले वर्षों में चावल का उत्पादन औसतन लाखों टन तक घट सकता है। यदि फसल उत्पादन प्रभावित होता है तो खाद्यान्न की आपूर्ति कम होगी और खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होगा। वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि खाद्य मुद्रास्फीति में अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

जलाशयों और बिजली उत्पादन पर भी असर

कम वर्षा का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी का स्तर घटने से पनबिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और पंपों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है।

पिछला रिकॉर्ड क्या कहता है?

1950 के बाद भारत में दर्ज 16 अल नीनो घटनाओं में से 9 बार मॉनसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 1982-83, 1997-98 और 2015-16 को सुपर अल नीनो के प्रमुख वर्षों के रूप में याद किया जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 2026 में भी ऐसी परिस्थितियां बनने पर बारिश में कमी, सूखे का खतरा और महंगाई जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होता। पूर्वोत्तर भारत में सामान्य वर्षा की संभावना बनी हुई है, जबकि उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों में अधिक जोखिम देखा जा रहा है।

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका को देखते हुए इस साल का मॉनसून न केवल किसानों बल्कि महंगाई, बिजली उत्पादन और आर्थिक विकास की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Post Views: 1
राष्ट्रीय

Post navigation

Previous Post: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेना प्रमुख, 30 जून को संभालेंगे कमान
Next Post: बेकार नहीं है बची हुई चाय पत्ती! मक्खियां भगाने से लेकर फर्नीचर चमकाने तक, जानिए इसके कमाल के उपयोग

Special Report

  • AC LED TV
    1 अक्टूबर से AC, फ्रिज और LED TV महंगे हो सकते हैं, कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम
  • Pitra Paksha 2026
    Pitra Paksha 2026: पितृ पक्ष 26 या 27 सितंबर से? जानें भ्रम की असली वजह और सही तारीख
  • GENDER IDENTITY 1
    जेंडर आइडेंटिटी पर बढ़ती बहस: युवाओं, सोशल मीडिया और चिकित्सा से जुड़े सवाल
  • एक्सप्रेसवे पर पलटा मछलियों से भरा कैंटर
  • खाने के बाद गैस और पेट फूलने की समस्या
  • दवा ₹2,700 की, MRP ₹27,000 पर सवाल
  • बारिश के बाद घूमने का मौसम शुरू
  • INDIA गठबंधन की अहम बैठक आज

Sanchar Times

देश-दुनिया, राजनीति, बिजनेस, खेल और मनोरंजन की ताजा खबरें हिंदी में पढ़ें।

ज़रूरी लिंक

होम
हमारे बारे में
संपर्क करें
Privacy Policy
Disclaimer

प्रमुख श्रेणियां

राष्ट्रीय
राज्य
राजनीति
अंतर्राष्ट्रीय
खेल
मनोरंजन

हमसे संपर्क करें

प्रधान संपादक: Pankaj Kumar
कार्यालय: 190, Pratap Nagar, Mayur Vihar Phase-1, Delhi – 110091
ईमेल: sanchartimes.news@gmail.com
मीडिया संपर्क: media@sanchartimes.news

सोशल मीडिया पर जुड़ें

  • Facebook
  • YouTube
  • Instagram
  • X
  • WhatsApp

© Sanchar Times. All Rights Reserved.

Powered by PressBook WordPress theme

होमराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया