
ST.News Desk

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में IPAC पर हुई रेड के मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जोरदार बहस हुई। ED ने आरोप लगाया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे “बेहद चौंकाने वाली घटना” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं छापे वाली जगह पहुंचीं, जिससे जांच प्रभावित हुई।
मेहता ने कोर्ट को बताया कि ED पीएमएलए की धारा 17 के तहत कार्रवाई कर रही थी, लेकिन राज्य पुलिस ने राजनीतिक तरीके से काम किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो इससे केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल टूटेगा। उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन की मांग की। इस पर जस्टिस मिश्रा ने सवाल किया कि क्या कोर्ट सीधे सस्पेंड करे, जिस पर मेहता ने सक्षम प्राधिकरण को निर्देश देने की बात कही।
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के DGP और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच में दखल के आरोपों पर जवाब जरूरी है।
मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले TMC कार्यकर्ताओं ने कोर्ट परिसर को “जंतर-मंतर” में बदल दिया और सुनवाई में बाधा डाली गई। ED का दावा है कि उनके वकील को ठीक से बहस नहीं करने दी गई और माइक बार-बार म्यूट किया गया।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने पक्ष रखा। सिब्बल ने आरोपों को “कलरिंग” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण जब्त करने का दावा गलत है। उन्होंने कहा कि केवल प्रतीक जैन का लैपटॉप और आईफोन लिया गया, जिसमें चुनावी जानकारी थी, और कोई बाधा नहीं डाली गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया है।

