ST.News Desk
निजी क्षेत्र के बैंक IDFC First Bank के शेयर 23 फरवरी को करीब 19% गिर गए, जब बैंक ने ₹590 करोड़ के कथित फ्रॉड का खुलासा किया। यह गड़बड़ी हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में सामने आई है, जो चंडीगढ़ स्थित एक विशेष शाखा के माध्यम से संचालित हो रहे थे।
रात 9:45 बजे तक बैंक का शेयर लगभग ₹68 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। एक्सचेंज डेटा के अनुसार 21.5 लाख से अधिक शेयरों के सेल ऑर्डर लंबित थे, जबकि खरीददार नहीं दिख रहे थे।
सीमित खातों तक सीमित मामला
बैंक ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि प्रारंभिक आंतरिक जांच में पाया गया है कि यह मामला चंडीगढ़ शाखा के जरिए संचालित हरियाणा सरकार से जुड़े “विशिष्ट समूह के खातों” तक ही सीमित है। बैंक ने स्पष्ट किया कि यह गड़बड़ी शाखा के अन्य ग्राहकों तक नहीं फैली है।
बैंक ने इस मामले की जानकारी बैंकिंग नियामक को दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। जांच लंबित रहने तक चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने संबंधित कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर दूसरी बैंक में बैलेंस ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान खाते में दर्ज राशि और वास्तविक बैलेंस में अंतर पाया गया। 18 फरवरी से अन्य सरकारी खातों में भी ऐसी ही विसंगतियां सामने आईं।
फिलहाल फ्रॉड की अनुमानित राशि ₹590 करोड़ बताई गई है। बैंक ने कहा है कि अंतिम राशि “रीकंसिलिएशन प्रक्रिया” के बाद ही स्पष्ट होगी, जिसमें दावों की पुष्टि और संभावित रिकवरी को शामिल किया जाएगा।
मुनाफे पर असर, पूंजी पर सीमित प्रभाव
ब्रोकरेज अनुमानों के अनुसार यह राशि बैंक की कुल नेटवर्थ का करीब 0.9% और वित्त वर्ष 2026 के प्री-टैक्स प्रॉफिट का लगभग 20% हो सकती है।
UBS ने अनुमान लगाया कि यह राशि FY26 के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स का लगभग 22% हो सकती है, हालांकि पूंजी पर प्रभाव करीब 1% तक सीमित रह सकता है।
Morgan Stanley ने भी संभावित असर FY26 के प्री-टैक्स प्रॉफिट का लगभग 20% बताया है।
Jefferies ने कहा कि बैंक को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि यह मामला अन्य ग्राहकों तक नहीं फैला है और यह कोई सिस्टमेटिक समस्या नहीं है।
हरियाणा सरकार ने दो बैंकों को किया डी-एम्पैनल
इस घटनाक्रम के बीच हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए तत्काल प्रभाव से डी-एम्पैनल कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अगले आदेश तक सरकारी धन इन बैंकों में जमा, निवेश या लेनदेन के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।
रिकवरी की प्रक्रिया शुरू
रिकवरी के तहत बैंक ने कुछ लाभार्थी बैंकों को “रिकॉल रिक्वेस्ट” भेजी है और संदिग्ध खातों में उपलब्ध बैलेंस पर लियन मार्क करने को कहा है।
हालांकि बैंक का कहना है कि पूंजी पर प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन शेयर में आई तेज गिरावट से साफ है कि निवेशक कॉरपोरेट गवर्नेंस, आंतरिक नियंत्रण और प्रतिष्ठा पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। अब बाजार की नजर अंतिम जांच रिपोर्ट और बैंक द्वारा उठाए जाने वाले भरोसा बहाली के कदमों पर रहेगी।

