- India-New Zealand Free Trade Agreement 20 अक्तूबर 2026 यानी दशहरा के दिन से लागू होगा.
- न्यूजीलैंड में भारत से निर्यात होने वाले 100 प्रतिशत सामान को Duty-Free Market Access मिलेगा.
- समझौते में 20 अरब डॉलर के निवेश और भारतीय छात्रों व Skilled Professionals के लिए Visa सुविधाओं का प्रावधान है.
नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ Free Trade Agreement यानी FTA 20 अक्तूबर 2026 से लागू हो जाएगा. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बढ़ाने के साथ निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है. FTA लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी सामान को Duty-Free Access मिलेगा. अभी न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, वाहन और Auto Components समेत कई भारतीय उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक Import Duty लगाता है. समझौता लागू होने के बाद यह शुल्क खत्म हो जाएगा.
न्यूजीलैंड की संसद से मिली मंजूरी
न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को FTA लागू करने से जुड़े कानून को मंजूरी दी थी. यह विधेयक 93 के मुकाबले 29 वोट से पारित हुआ. सत्ताधारी National Party के साथ मुख्य विपक्षी Labour Party ने भी समझौते का समर्थन किया. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि भारत के साथ Trade Agreement को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब यह अक्तूबर से लागू होगा. उन्होंने कहा कि इससे न्यूजीलैंड के Exporters को भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी. व्यापार बढ़ने से देश में रोजगार और आमदनी के नए अवसर बनने की उम्मीद है.
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भारतीय Exporters को क्या फायदा होगा?

समझौते के तहत न्यूजीलैंड अपनी सभी Tariff Lines पर भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच देगा. इससे Textiles and Apparel, Leather, Footwear, Gems and Jewellery, Engineering Goods और Processed Food जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है. भारतीय कंपनियों के उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे. Import Duty खत्म होने से भारतीय Exporters की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और छोटे तथा मध्यम उद्योगों को भी नए ऑर्डर मिलने की संभावना बनेगी. न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है. यह निवेश Infrastructure, Renewable Energy, Technology, Research, Innovation और Skill Development जैसे क्षेत्रों में आ सकता है.
भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को दी सुरक्षा
न्यूजीलैंड से भारत आने वाले उत्पादों के मामले में 70.03 प्रतिशत Tariff Lines पर Market Access दिया गया है. यह दोनों देशों के मौजूदा व्यापार के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है. भारत ने 29.97 प्रतिशत Tariff Lines को समझौते से बाहर रखा है. इनमें Dairy Products, चीनी, कई कृषि वस्तुएं, कुछ धातु और दूसरे संवेदनशील उत्पाद शामिल हैं. इससे भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों को अचानक बढ़ने वाले सस्ते आयात से बचाने का प्रयास किया गया है. लकड़ी, ऊन, Sheep Meat और Raw Hides जैसी वस्तुओं पर शुल्क तुरंत खत्म होगा. बाकी उत्पादों पर Import Duty को तीन, पांच, सात या दस साल में धीरे-धीरे कम किया जाएगा.
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सेब, कीवी और मानुका शहद के लिए Quota
Wine, Medicines, Polymers और कुछ Aluminium, Iron तथा Steel Products पर शुल्क कम किया जाएगा. मानुका शहद, सेब, Kiwifruit और Albumin जैसे उत्पादों पर Tariff Rate Quota लागू होगा. इसका मतलब है कि एक तय मात्रा तक कम शुल्क पर आयात की अनुमति मिलेगी. निर्धारित सीमा से ज्यादा आयात होने पर सामान्य या अधिक शुल्क लगाया जा सकता है.
FTA में Agriculture Cooperation का भी प्रावधान किया गया है. भारत और न्यूजीलैंड कीवी, सेब और शहद उत्पादन में Research, Planting Material, Technology, Orchard Management, Post-Harvest Processing, Supply Chain और Food Safety पर मिलकर काम करेंगे.
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छात्रों और Skilled Professionals को Visa सुविधा
समझौते के तहत Temporary Employment Entry Visa व्यवस्था में 5,000 Skilled Indians को कोटा मिलेगा. पात्र भारतीय तीन साल तक न्यूजीलैंड में रहकर काम कर सकेंगे. इनमें आयुष चिकित्सक, योग शिक्षक, भारतीय Chef, Music Teacher और IT, Engineering, Healthcare, Education तथा Construction से जुड़े Professionals शामिल हो सकते हैं.
Working Holiday Visa के तहत हर साल 1,000 युवा भारतीयों को 12 महीने तक न्यूजीलैंड जाने का अवसर मिलेगा. पात्र भारतीय छात्र पढ़ाई के दौरान सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकेंगे. योग्यता के आधार पर पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें लंबी अवधि का Work Visa भी मिल सकता है. Services के मामले में न्यूजीलैंड ने 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धता जताई है, जबकि 139 क्षेत्रों में Most Favoured Nation Treatment देने का प्रावधान है. इससे भारतीय Service Companies को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं.
कुल मिलाकर यह FTA भारतीय Exporters को नया बाजार देगा, जबकि न्यूजीलैंड की कंपनियों को भारत के बड़े Consumer Market तक पहुंच मिलेगी. दोनों देशों को उम्मीद है कि Trade, Investment और Employment बढ़ने से आर्थिक संबंध लंबे समय के लिए मजबूत होंगे.

