नई दिल्ली/गोरखपुर: शारदीय नवरात्र के अंतिम चरण में आज महानवमी के अवसर पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जा रही है। देशभर के मंदिरों में श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर हवन, कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है। महानवमी के बाद कल विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
आज महानवमी, मां सिद्धिदात्री की हो रही पूजा
नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धि और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। श्रद्धालु पूजा-पाठ और हवन के साथ नौ दिनों की साधना पूर्ण कर रहे हैं। कई परिवारों में महानवमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर उपहार दिए जाते हैं।
कल दशहरा, मनाया जाएगा विजय का पर्व
महानवमी के अगले दिन विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है। इसे दशहरा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। दशहरे पर देश के कई हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। रामलीला के समापन के साथ मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
नवरात्र से दशहरे तक भक्ति और उत्साह का माहौल
नवरात्र के नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत, पूजा और आराधना के माध्यम से मां दुर्गा की उपासना करते हैं। महानवमी के साथ जहां नवरात्र की पूजा का प्रमुख चरण पूरा होता है, वहीं दशहरा उत्सव के उल्लास और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।
यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। नवरात्र और दशहरे का संदेश यही है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत सत्य और अच्छाई की होती है।






















