निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ साफ; जानें बाजार गिरने की 5 बड़ी वजहें
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारी गिरावट देखने को मिली। दोपहर करीब 1:40 बजे तक BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी, दोनों प्रमुख सूचकांक डेढ़ फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे थे। सेंसेक्स करीब 1,100 अंक से ज्यादा टूटकर 71,500 के स्तर से भी नीचे चला गया। वहीं निफ्टी 50 में करीब 380 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,222 के स्तर से नीचे आ गया।
बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। कुछ ही घंटों में शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप करीब ₹10 लाख करोड़ कम हो गया। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा मौद्रिक नीति के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ाया है।
कुछ घंटों में ₹10 लाख करोड़ की संपत्ति घटी
गुरुवार को बाजार खुलने के समय BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4,70,98,931 करोड़ यानी लगभग ₹4.71 लाख करोड़ बताया गया था। दोपहर तक यह घटकर करीब ₹4,61,95,228 करोड़ रह गया।

इस तरह कुछ ही घंटों में बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹9 लाख करोड़ से अधिक की कमी दर्ज की गई। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की संपत्ति में यह बड़ी गिरावट बाजार की कमजोर धारणा को दर्शाती है।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
भारतीय शेयर बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती का दबाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल, कंपनियों की लागत और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर असर पड़ सकता है।
2. RBI की मौद्रिक नीति पर बाजार की नजर
निवेशक RBI की ताजा मौद्रिक नीति और उसके आगे के असर का आकलन कर रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी और RBI के ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख से इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में फिक्स्ड इनकम वाले निवेश विकल्प भी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इससे इक्विटी बाजार में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹6,121 करोड़ से अधिक की निकासी की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब ₹4,596 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने से भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। ऊंची अमेरिकी यील्ड के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
5. कमजोर वैश्विक संकेत और भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है। ऊंची बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में दबाव देखा गया। एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को मिला-जुला रुख रहा।
मार्केट एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों का असर सबसे पहले उन शेयरों के वैल्यूएशन पर दिखाई दे सकता है जिनकी कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य घट सकता है, जिससे हाई-वैल्यूएशन वाले शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे माहौल में निवेशकों का रुझान उन सेक्टरों की तरफ बढ़ सकता है जिनकी कमाई ब्याज दरों में बदलाव से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है। फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर इस नजरिए से चर्चा में हैं।
हालांकि, ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। दूसरी ओर, वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहने की बात बाजार विशेषज्ञों ने कही है।
निफ्टी के लिए कौन से स्तर अहम?
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर सकता है। निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं व्यापक नजरिए से 23,100 का स्तर ऊपर की दिशा में अहम लक्ष्य बना हुआ है।
हालांकि, बाजार की दिशा तय करने में आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों के संकेत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आगे बाजार की दिशा किन चीजों पर निर्भर करेगी?
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से इन संकेतकों पर रहेगी:
- RBI की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर आगे का रुख
- विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड
- वैश्विक शेयर बाजारों का प्रदर्शन
- भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे और कमाई के अनुमान
कुल मिलाकर, गुरुवार की गिरावट के पीछे किसी एक कारक के बजाय घरेलू मौद्रिक नीति, महंगा कच्चा तेल, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों का संयुक्त प्रभाव दिखाई दे रहा है। बाजार की अगली दिशा इन संकेतकों में सुधार या और कमजोरी पर निर्भर करेगी।
























