उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल पर बातचीत शुरू हो गई है. कांग्रेस की ओर से 200 सीटों की मांग का बयान सामने आ चुका है. हालांकि सपा को सौंपी गई सूची में करीब 170 सीटें होने की रिपोर्ट है. अंतिम समझौता अभी बाकी है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है. पार्टी के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पहले 200 सीटों की मांग और बराबर सम्मान की बात कही थी. अब दोनों दलों के बीच सीटों पर बातचीत शुरू होने की खबर है.
200 सीटों की मांग, सूची में करीब 170 सीटें
कांग्रेस की मांग और सपा को सौंपी गई सीटों की सूची को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने करीब 170 विधानसभा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को दी है. वहीं नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में यह संख्या 172 बताई गई है. इसलिए 200 सीटों की राजनीतिक दावेदारी को 200 सीटों की सूची सौंपे जाने या इतनी सीटें मिलने की सहमति के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
A, B, C और D कैटेगरी में बांटी गईं सीटें
रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने अपनी सूची की सीटों को A, B, C और D कैटेगरी में रखा है. इनका चयन जमीनी फीडबैक के आधार पर किया गया है. अलग-अलग श्रेणियों के जरिए पार्टी बातचीत में अपनी प्राथमिकता सामने रख रही है.
लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन से बढ़ी कांग्रेस की उम्मीद
कांग्रेस अपनी दावेदारी के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन और संगठन को मजबूत करने की कोशिशों का हवाला दे रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं. इस तरह दोनों दलों को कुल 43 सीटें मिली थीं. कांग्रेस अब विधानसभा चुनाव में भी अपने लिए ज्यादा राजनीतिक जगह चाहती है. पार्टी का तर्क है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों और संगठन विस्तार को सीटों के तालमेल में महत्व मिलना चाहिए.
प्रियंका गांधी की भूमिका पर भी नजर
सीट बंटवारे की बातचीत में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वह सपा के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत में हिस्सा ले रही हैं. दोनों दलों के सामने चुनौती ऐसी सीटों पर सहमति बनाने की होगी, जहां उनके अपने नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी है.
अभी तय नहीं हुआ सीट बंटवारे का फॉर्मूला
फिलहाल कांग्रेस की सूची बातचीत का आधार है. इससे यह तय नहीं होता कि सूची में शामिल सभी सीटें पार्टी को मिलेंगी. दोनों दल कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और कौन-सी सीट किसके हिस्से आएगी, इसकी तस्वीर अंतिम सहमति के बाद साफ होगी.






















