crossorigin="anonymous"> झारखंड में हाथियों का कहर: पश्चिमी सिंहभूम में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, 13 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा - Sanchar Times

झारखंड में हाथियों का कहर: पश्चिमी सिंहभूम में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, 13 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा

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ST.News Desk
पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड)| झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोईलकेरा प्रखंड क्षेत्र में हाथी के हमले में एक ही परिवार के तीन सदस्यों—पिता और उनके दो बच्चों—की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में कुंदरा बाहदां, कोदमा बाहदां और सामू बाहदां शामिल हैं। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

एक बच्ची गंभीर रूप से घायल

इसी घटना में परिवार की एक अन्य बच्ची जिंगीं बाहदां गंभीर रूप से घायल हो गई है। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए ओडिशा के राउरकेला रेफर कर दिया है। बताया जा रहा है कि बच्ची के सिर में गंभीर चोट आई है। घटना के बाद से गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मौके पर पहुंचा वन विभाग, तत्काल सहायता

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को तत्काल मुआवजे के तौर पर 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। साथ ही आवश्यक कागजी प्रक्रिया भी पूरी की गई। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि न तो पर्याप्त है और न ही स्थायी समाधान का विकल्प।

13 लोगों की जा चुकी है जान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथियों के हमले से अब तक इस क्षेत्र में कुल 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 6 मौतें अकेले गोईलकेरा प्रखंड में हुई हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाथी के आतंक का वीडियो वायरल

इस ताजा घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के आतंक से निजात दिलाने के लिए वन विभाग अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार नहीं कर सका है। लोगों का यह भी कहना है कि मुआवजे की राशि बेहद कम है और इससे पीड़ित परिवारों को वास्तविक राहत नहीं मिल पाती।

वन विभाग की चुप्पी

फिलहाल वन विभाग की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। साथ ही इस इलाके में जंगली हाथियों से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की चिंता और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।


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