ST.News Desk
बिहार विधानसभा चुनावों में भारी पराजय के एक दिन बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शनिवार को कहा कि राजनीतिक यात्रा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और पार्टी गरीबों की आवाज़ उठाने के अपने संकल्प पर कायम रहेगी। पार्टी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जनसेवा एक अनवरत प्रक्रिया है, एक अंतहीन यात्रा है। हार में विषाद नहीं, जीत में अहंकार नहीं! राजद गरीबों की पार्टी है और गरीबों की आवाज़ बुलंद करती रहेगी।”
चुनावी अभियान के दौरान जब तेजस्वी यादव को महागठबंधन के सहयोगियों की इच्छा के विपरीत मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था, तब शायद ही किसी ने अनुमान लगाया होगा कि शानदार शुरुआत के बाद पार्टी इतनी बड़ी हार का सामना करेगी। राघोपुर से भाजपा उम्मीदवार सतीश कुमार को हराकर तेजस्वी ने अपनी सीट तो बचा ली, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी 25 सीटों तक सिमट गई।
तेजस्वी यादव, जिन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहकर राजनीति में कदम रखा था, पिछले एक दशक में बिहार राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। उन्हें 2015 में उपमुख्यमंत्री बनाया गया और लालू प्रसाद ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था। हालांकि, कथित अवैध भूमि लेनदेन से जुड़े धनशोधन मामले में उनका नाम आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए और नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर दोबारा एनडीए का हाथ थाम लिया।
2020 के चुनाव में 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने वाले राजद की सीटें इस बार आधे से भी कम हो गईं। माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा ‘जंगलराज’ के नैरेटिव को तेजस्वी यादव प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दे सके। चुनावी मंचों पर राजद उम्मीदवारों और युवा समर्थकों के कथित अनुचित व्यवहार ने भी इस नैरेटिव को बल दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि लंबे अनुभव के बावजूद तेजस्वी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नीतीश कुमार के आकलन में चूक गए, जिसने अंततः चुनावी परिणामों को प्रभावित किया।

