Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा ट्रांजिट शुल्क वसूली की खबरों के बीच भारत ने साफ किया है कि उसने इस संबंध में कोई भुगतान नहीं किया है और स्वतंत्र व सुरक्षित आवागमन की मांग दोहराई है
ST.News International Desk
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद Strait of Hormuz से जहाजों के आवागमन को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कुछ जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर तक का ट्रांजिट शुल्क वसूल रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) से बातचीत में कहा कि यह शुल्क ईरान की सामरिक ताकत को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से यह मार्ग तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों के लिए प्रभावित रहा है।
वहीं भारत ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसने ईरान को किसी भी तरह का ट्रांजिट शुल्क नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि “होर्मुज स्ट्रेट पर टोल वसूली की खबरें हमें भी मिली हैं, लेकिन भारत और ईरान के बीच इसको लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।”
भारत ने यह भी दोहराया कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों के “स्वतंत्र और सुरक्षित” आवागमन का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो उस समय निर्णय लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सीजफायर से पहले भी ईरान द्वारा शुल्क वसूली की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, ईरान ने भारत को मित्र देश मानते हुए उसके जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।
गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर है और करीब 90 प्रतिशत तेल और गैस का आयात इसी क्षेत्र से करता है। हाल ही में भारतीय ध्वज वाले 8 एलपीजी टैंकर Strait of Hormuz से सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं।
फिलहाल यह मुद्दा पाकिस्तान में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता में भी अहम बनता जा रहा है, जहां इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और शुल्क विवाद पर चर्चा होने की संभावना है।

