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अवैध खनन से सोन नदी के तटीय इलाकों में जल संकट, ग्रामीणों में आक्रोश

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सासाराम
हैदर अली, रोहतास ब्यूरो चीफ

गर्मी शुरू होते हीं सोन नदी के तटीय इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। सोन नदी के किनारे बसे सैकड़ो गांव जलस्तर खिसकने के कारण प्रभावित हैं और ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के कथनानुसार डेहरी, डालमियानगर, न्यू सिधौली से लेकर नासरीगंज तक लोग घटते जल स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं।

अवैध खनन से उत्पन्न हुई समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि सोन नदी में हो रहे अवैध खनन के कारण सोन नदी के तटीय इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है। इन गांवों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है और गर्मी शुरू होते हीं सभी चापाकल, कुएं व मोटर पंप सूखने लगे हैं। लोगों को पेयजल के साथ-साथ सब्जियों की सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है। बता दें कि सोन नदी के तटीय इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सब्जी आदि की खेती करते हैं। बोरिंग के सहारे इन फसलों की सिंचाई होती है, लेकिन जल स्तर नीचे जाने से खेती बाड़ी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

बांध बनाकर धारा परिवर्तित

ग्रामीणों के अनुसार सोन नदी में अवैध उत्खनन के लिए बालू माफियाओं द्वारा बांध बनाकर धारा को परिवर्तित कर दिया गया है। पहले सोन नदी की मुख्य धारा स्वतंत्र रूप से एक छोर से होकर गुजरती थी, लेकिन अब इस धारा को अवैध खनन के लिए नदी के दूसरी छोर की तरफ मोड़ दिया गया है। जिससे जलस्तर काफी नीचे खिसक गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इन गांवों में पहले 30 से 40 फीट पर पानी मिलता था, जो अब 70 से 80 फीट के बाद भी नहीं मिल रहा है।

नल जल योजना भी फेल

वहीं घटते जलस्तर की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने नल जल योजना को भी विफल बताया। ग्रामीणों ने कहा कि नल जल योजना के द्वारा कभी भी पानी की नियमित आपूर्ति नहीं होती और कभी-कभी कई दिनों तक पानी की सप्लाई बाधित रहती है। अनियमित और विलंब से पानी की सप्लाई होने से खासतौर पर मजदूर वर्ग के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं खनन विभाग से बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सोन नदी में बालू खनन के लिए बनाए गए बांध को तत्काल हटाकर नदी की मुख्य धारा को स्वतंत्र रूप से बहने दिया जाए, जिससे आसपास के इलाकों में जलस्तर बना रह सके।


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