आम आदमी पार्टी के भीतर न्यायिक प्रक्रिया को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। Arvind Kejriwal और Manish Sisodia के बाद अब एक और नेता ने अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है
ST.News Desk
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और न्यायपालिका के बीच टकराव का मामला गहराता जा रहा है। Durgesh Pathak ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखकर साफ कर दिया है कि वह इस केस में अदालत के सामने पेश नहीं होंगे। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि न तो वह खुद पेश होंगे और न ही उनकी ओर से कोई वकील अदालत में जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह Arvind Kejriwal के साथ खड़े हैं।
इससे पहले Arvind Kejriwal ने 27 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर न्याय मिलने की उम्मीद खत्म होने की बात कही थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि वह गांधीवादी सिद्धांतों और सत्याग्रह की भावना के तहत अदालत में पेश नहीं होंगे और कोई दलील भी नहीं रखेंगे।
उनके बाद Manish Sisodia ने भी इसी तरह का कदम उठाते हुए जस्टिस को पत्र लिखकर अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया।
क्या है विवाद की वजह?
दरअसल, Arvind Kejriwal आबकारी नीति 2021-22 मामले में पहले राउज़ एवेन्यू कोर्ट से बरी हो चुके थे, लेकिन Central Bureau of Investigation (CBI) ने इस फैसले को Delhi High Court में चुनौती दी। इसके बाद यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पहुंचा।
केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को केस से अलग करने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल पाएगी।
हितों के टकराव का आरोप
केजरीवाल ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे Tushar Mehta के अधीन कार्यरत हैं और केंद्र सरकार के पैनल काउंसिल के रूप में जुड़े हुए हैं। चूंकि इस केस में CBI की ओर से Tushar Mehta वकील हैं, ऐसे में उन्होंने ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की आशंका जताई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और विवाद बढ़ने की संभावना है।

