आरोपों के केंद्र में कंपनी की प्रबंध निदेशक Nirja Saraf का नाम सामने आ रहा है
संचार टाइम्स द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत किए जाने के बाद मामले पर कार्रवाई शुरू
नई दिल्ली/पुणे: सरकारी दवा कंपनी Hindustan Antibiotics Limited (HAL) एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के कामकाज, खरीद प्रक्रियाओं और वित्तीय फैसलों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संचार टाइम्स द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत किए जाने के बाद मामले पर कार्रवाई शुरू हुई है। आरोपों के केंद्र में कंपनी की प्रबंध निदेशक Nirja Saraf का नाम सामने आ रहा है।
HAL देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की फार्मा कंपनी है, जिसकी स्थापना 1954 में हुई थी। कंपनी लंबे समय से एंटीबायोटिक दवाओं के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसकी वित्तीय स्थिति कमजोर बताई जाती रही है। अब सामने आ रहे आरोपों ने कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं पर सवाल
सूत्रों के अनुसार कंपनी में कई टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ निजी कंपनियों को नियमों से हटकर लाभ पहुंचाया गया। यह भी आरोप हैं कि कई मामलों में गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के बावजूद सप्लाई को मंजूरी दी गई।
भाई-भतीजावाद और नियुक्तियों पर चर्चा
कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुछ नियुक्तियों में रिश्तेदारी और निजी संबंधों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोप हैं। वित्त और खरीद विभाग से जुड़े पदों पर कथित तौर पर करीबी लोगों की नियुक्ति को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष की चर्चा है।
कर्मचारियों में डर और दबाव का माहौल
सूत्रों के मुताबिक कंपनी के भीतर विरोध करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। निलंबन, ट्रांसफर और पदावनति जैसी धमकियों की चर्चाएं भी सामने आई हैं। इन आरोपों के कारण कर्मचारियों में भय और असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।
सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल
सूत्रों का दावा है कि कंपनी के गेस्ट हाउस और सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच लंबे समय से सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल की चर्चाएं होने की बात कही जा रही है।
करोड़ों की परियोजनाओं पर विवाद
कंपनी की कुछ बड़ी परियोजनाओं और आईटी सिस्टम से जुड़े खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद और सप्लाई से जुड़े सौदों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
कंपनी की छवि और जवाबदेही पर बहस
Hindustan Antibiotics Limited जैसे रणनीतिक महत्व वाले सार्वजनिक उपक्रम पर लगे इन आरोपों ने संस्थान की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत महसूस होगी।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इन आरोपों पर कंपनी या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने सरकारी उपक्रमों में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

