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मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईंधन बचत अभियान तेज, पीएम मोदी ने काफिले में 50% कटौती के दिए निर्देश

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खुद पहल करते हुए अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या आधी करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री भी अब ईंधन बचत अभियान में शामिल हो गए हैं

ST.News Desk

मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारत में ईंधन बचत को लेकर बड़े स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सुरक्षा काफिले में शामिल वाहनों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक कटौती करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है और कहा है कि इसके लिए नए वाहन खरीदने की बजाय मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाए।

प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद केंद्रीय मंत्रालयों और बीजेपी शासित राज्यों में भी ईंधन बचत को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। गृह मंत्री Amit Shah ने भी अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा दी है। वहीं केंद्रीय मंत्री C. R. Patil ने एस्कॉर्ट वाहन न लेने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने काफिले के साथ-साथ मंत्रियों और नौकरशाहों की गाड़ियों की संख्या में 50 प्रतिशत कटौती करने का आदेश दिया है। उन्होंने सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने और सरकारी बैठकों को 50 प्रतिशत तक ऑनलाइन करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की गई है।

मध्य प्रदेश में ऊर्जा मंत्री Pradyuman Singh Tomar ई-स्कूटर चलाते नजर आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद वे पेट्रोल की बचत के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ने सरकारी गाड़ी छोड़कर ई-रिक्शा से सफर शुरू कर दिया है।

दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने भी सरकारी कामकाज के लिए मेट्रो और ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया, ताकि लोगों के बीच ईंधन बचत का संदेश पहुंचाया जा सके।

सरकार के इन कदमों को बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी दिया जा रहा है कि ईंधन बचत केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय अभियान है।


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