सासाराम में 12 वार्ड पार्षदों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, मेयर की कार्यशैली और निगम प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
सासाराम
हैदर अली, रोहतास ब्यूरो चीफ संचार टाइम्स
सासाराम स्थित माया लॉज में नगर निगम सासाराम के 12 वार्ड पार्षदों ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मेयर काजल कुमारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्षदों ने 13 मई 2026 को प्रकाशित एक समाचार में मेयर द्वारा पार्षदों को “लुटेरों का गैंग” बताए जाने पर कड़ा विरोध जताया और इसे जनप्रतिनिधियों की मानहानि तथा लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान पार्षदों ने कहा कि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और उन्हें “गुंडा गैंग” एवं “लुटेरा” जैसे शब्दों से संबोधित करना उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि मेयर की भाषा न केवल असम्मानजनक है, बल्कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा के भी विपरीत है।
पार्षदों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बोर्ड बैठकों में पार्षदों द्वारा प्रस्तावित विकास योजनाओं को जानबूझकर एजेंडे में शामिल नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि मेयर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए मनमाने तरीके से निर्णय ले रही हैं, जिससे निगम की लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई गंभीर आरोप भी लगाए गए। पार्षदों ने दावा किया कि कई बार ऐसे विकास कार्यों की संचिकाओं (फाइलों) पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया जाता है, जिनका कार्य धरातल पर हुआ ही नहीं है। उन्होंने इसे नगर पालिका अधिनियम और वित्तीय पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इसके अलावा पार्षदों ने शिकायत की कि उनके वार्डों में होने वाले विकास कार्यों और शिलान्यास कार्यक्रमों की जानकारी संबंधित वार्ड पार्षदों को नहीं दी जाती। उनका कहना है कि मेयर और नगर आयुक्त आपसी तालमेल से नियमों की अनदेखी कर निर्णय ले रहे हैं, जिससे जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका लगातार कमजोर हो रही है।
प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से वार्ड 24 की पार्षद आरिशा हुसैन, वार्ड 44 की केला देवी, वार्ड 45 के अनुज कुमार, वार्ड 07 के अमित कुमार, वार्ड 23 के राजेश कुमार, वार्ड 30 की धन केसरी देवी, वार्ड 21 के गुलशन अफरोज और वार्ड 09 की दशमी देवी सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे।
सभी 12 पार्षदों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि मेयर अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करतीं और जनप्रतिनिधियों के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तो वे इस पूरे मामले को उच्च अधिकारियों और न्यायालय तक ले जाकर कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

